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अगर आप नियमित पूजा करते हैं तो उसकी एक ऐसी ड्रिल बनाइए कि उसमें जो भी काम आप करें- चाहे माला जपें, भगवान को स्नान कराएं, किसी पुस्तक का पारायण करें, कोई भजन गाएं- जो भी करें रुककर करें, टिककर करें। उस समय न अतीत में जाएं, न भविष्य को सोचें। बहुत सारी पूजा ना करें, कोई एक या दो काम करें, पर रुककर करें। चूंकि आजकल मल्टीटास्किंग का जमाना है, लोग अपने कारोबार की दुनिया में एक साथ बहुत सारे काम करते हैं तो वही आदत पूजा में भी अपनाते हैं। पूजा पूरी तरह रुक कर की जानी चाहिए। मनोवैज्ञानिक तो कहते हैं कि जब भी कोई काम करो, उस पर 20 मिनट का फोकस रखो। आजकल लोग हर 5-10 मिनट में कुछ न कुछ काम बदलते रहते हैं। मानव मस्तिष्क मूल रूप से एकाग्रता के लिए बना है। चौबीस घंटे में यदि सात बार एकाग्रता साध लें तो आप पाएंगे कि कितना ही काम हो, आप थकेंगे नहीं। कितनी ही विपरीत परिस्थितियां हों, आप अशांत नहीं होंगे। अपना कारोबार, परिवार, समाज, राष्ट्र और निजी जीवन को एक साथ साधना ही मल्टीटास्किंग है।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: एकाग्रता साध लें तो कितना ही काम हो, थकेंगे नहीं

