[ad_1]
Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि महिला वोट बैंक को लेकर भी बेहद दिलचस्प हो गया है. एक तरफ ममता बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी ने बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार उतारकर, साथ ही शशि पांजा और सायोनी घोष जैसी नेताओं को प्रचार में आगे कर महिला ब्रिगेड को मजबूत किया है, तो दूसरी ओर भाजपा ने महिला आरक्षण को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है.
चुनाव प्रचार चेहरों के भरोसे
ममता बनर्जी ने महिला वोटों को साधे रखने और भाजपा को काउंटर करने के लिए अपनी मजबूत महिला ब्रिगेड मैदान में उतार दी है. इस सूची में चंद्रिमा भट्टाचार्य, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, जून मालिया, प्रतिमा मंडल, अदिति मुंशी, सायंतिका बनर्जी और रचना बनर्जी जैसे नाम शामिल हैं.
पार्टी ने सिर्फ अनुभवी नेताओं ही नहीं, बल्कि ग्लैमर और युवा चेहरों को भी उतारकर चुनावी माहौल को धार दी है. सायोनी घोष अपनी रैलियों में ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा बुलंद कर युवाओं और महिलाओं को जोड़ रही हैं, जबकि रचना बनर्जी, शताब्दी रॉय और जून मालिया ग्रामीण इलाकों में सीधे महिलाओं से संवाद कर रही हैं.
इसके जवाब में बीजेपी ने पार्टी की सांसद और दिग्गज अभिनेत्री कंगना रनौत ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार सुभेंदु अधिकारी के समर्थन में एक भव्य रोड शो कर माहौल बना दिया. खुली जीप में सवार कंगना ने जब नंदीग्राम की सड़कों पर हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया, तो प्रशंसकों और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा.
लक्ष्मी भंडार बनाम मातृ शक्ति वंदन
‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को भी जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा है. इससे महिलाओं में TMC के प्रति भरोसा मजबूत करने की कोशिश है. महिला नेता घर-घर जाकर संवाद कर रही हैं. राज्य सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सुरक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक कल्याण—को सीधे मतदाताओं तक पहुंचा रही हैं. पार्टी का मानना है कि महिलाओं के साथ यह सीधा संपर्क चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
महिलाओं को 3 हजार रुपये देने का वादा बीजेपी ने किया
इसके मुकाबले बीजेपी ने ‘मातृ शक्ति वंदन’ योजना के तहत 3000 रुपये देने का वादा किया है. महिलाओं को केंद्र में रखकर बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है. भाजपा सरकार बनने पर हर महिला को सालाना ₹36,000 देने का वादा किया गया. साथ ही टीएमसी पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने और अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया गया. हालांकि, ममता की ‘बंगाल की बेटी’ वाली छवि को तोड़ना बीजेपी के लिए कठिन चुनौती है. पार्टी के पास फिलहाल ममता बनर्जी जैसा कोई स्थानीय चेहरा नहीं है.
महिला आरक्षण की ओट में बीजेपी
वहीं, भाजपा महिला आरक्षण कानून के लागू न होने और इसमें देरी को बड़ा मुद्दा बनाकर TMC और विपक्ष पर हमला बोल रही है. पार्टी का आरोप है कि महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभी भी नहीं मिला है और इसे चुनावी वादों तक सीमित रखा गया है. भाजपा इस मुद्दे के जरिए शहरी और शिक्षित महिला वोटर्स को साधने की कोशिश कर रही है.
महिलाओं पर किसको कितना भरोसा
पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने 52 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है. ममता बनर्जी की इस रणनीति के पीछे सोच है कि वे चुनाव में महिला वोटरों को आकर्षित करेंगी. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने महज 33 महिलाओं को टिकट दिया है. यह कुल उम्मीदवारों का करीब 11.22 प्रतिशत है. हालांकि पिछले चुनाव में बीजेपी में 13% महिला प्रत्याशी उतारी थी.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (23 और 29 अप्रैल) से पहले उम्मीदवारों के विश्लेषण में साफ दिखता है कि राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है. इस बार कुल उम्मीदवारों में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ करीब 11% है. हालांकि, TMC इस मामले में बाकी दलों से काफी आगे है—पार्टी ने 291 में से 52 महिला उम्मीदवार उतारे हैं, जो लगभग 27.2% है.
वहीं, वाम दलों और CPI(M) के गठबंधन ने 253 सीटों में से 34 (13.43%) पर महिलाओं को मौका दिया है. कांग्रेस ने 294 सीटों में से 35 (11.9%) और भाजपा ने 294 में से 33 (11.2%) महिला उम्मीदवार उतारे हैं, जो सबसे कम अनुपात है.
राज्य की पिछली विधानसभा में 41 महिला विधायक थीं, जो राष्ट्रीय औसत 8% से ज्यादा है, लेकिन वैश्विक औसत 24% से अभी भी काफी पीछे है. महिला आरक्षण कानून के बावजूद, जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की चुनौती अब भी बनी हुई है.
यह भी पढ़ें: बंगाल में पीएम मोदी की रैली के बाद बोले भाजपा प्रत्याशी- हमारी जीत सुनिश्चित है, TMC की विदाई तय
[ad_2]
दीदी की महिला सेना की काट में बीजेपी ने खेला ‘तुरुप का पत्ता’… क्या इस बार वुमन वोटर करेगी खेला


