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अंबाला: हरियाणा की अनाज मंडियों में इन दिनों गेहूं खरीद का सीजन चल रहा है, लेकिन इस बार किसानों के चेहरों पर खुशी कम और चिंता ज्यादा दिखाई दे रही है. दरअसल, सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, ट्रैक्टर नंबर प्लेट की अनिवार्यता और गेहूं में नमी की सख्त जांच जैसे प्रावधानों के कारण मंडियों में किसान काफी परेशान नजर आ रहे हैं.
क्या है किसानों की परेशानी
बता दें कि अंबाला शहर की अनाज मंडी में सुबह से ही किसानों के चेहरों पर मायूसी देखने को मिलती है, क्योंकि अपनी मेहनत की फसल लेकर मंडी पहुंचे किसान घंटों इंतजार करने को मजबूर हो जाते हैं कि उनका बायोमेट्रिक मशीन पर फिंगरप्रिंट कब सही से मिलान होगा. कई बार तकनीकी खामियों के चलते मशीनें काम नहीं करतीं, जिससे किसानों को बार-बार लाइन में लगना पड़ता है और तेज धूप में खड़े ये किसान थकान से परेशान हो जाते हैं.
मंडी में आकर परेशानी और बढ़ गई
इस बारे में लोकल 18 की टीम से बातचीत में बुजुर्ग किसान गुरदेव सिंह बताते हैं कि साल भर मेहनत करके फसल तैयार की थी और सोचा था कि इस बार कुछ राहत मिलेगी, लेकिन मंडी में आकर परेशानी और बढ़ गई. उन्होंने कहा कि आधा-आधा घंटा सिर्फ अंगूठा लगवाने में निकल जाता है. ऐसे में मंडी प्रशासन कहता है कि सिर्फ 90 क्विंटल गेहूं ही खरीदी जाएगी, जबकि ट्रैक्टर में 110 क्विंटल तक गेहूं आ जाता है. इसके बावजूद एक ट्रैक्टर से केवल 90 क्विंटल ही खरीदी की जा रही है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है.
पिछली बार धान खरीद में भी सरकार से सही दाम नहीं मिला था
उन्होंने यह भी बताया कि जब फिंगरप्रिंट नहीं मिलता, तो मंडी प्रशासन कहता है कि अपने किसी परिचित या परिवार के सदस्य को नॉमिनी बना दें. लेकिन ज्यादातर किसानों के बच्चे नौकरी की तलाश में विदेश में हैं, ऐसे में अंगूठा लगाने कौन आएगा. उन्होंने कहा कि पिछली बार धान खरीद में भी सरकार से सही दाम नहीं मिला था और अब वे चाहते हैं कि उनकी फसल का उचित मूल्य मिले. क्योंकि फसल तैयार करते समय खाद के साथ दुकानदार दवाई भी दे देता है, जो काफी महंगी पड़ती है, और उचित दाम न मिलने पर किसानों को घाटा उठाना पड़ता है.
सबसे ज्यादा परेशानी बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) में आ रही है
वहीं किसान मनप्रीत सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) में आ रही है. युवा किसानों का फिंगरप्रिंट आसानी से मिल जाता है, लेकिन बुजुर्ग किसानों का नहीं मिल पाता, जिसके कारण गेट पास के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. उन्होंने कहा कि इस बार हुई बेमौसमी बारिश के कारण गेहूं में नमी बढ़ गई है और अब 12 प्रतिशत से ज्यादा नमी वाले गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है.
नए नियमों ने परेशानियों को और बढ़ा दिया है
ऐसे में कई किसान अपनी फसल को मंडी में खुले आसमान के नीचे फैलाकर सुखा रहे हैं और धूल व तेज धूप के बीच बार-बार उसे पलट रहे हैं ताकि नमी कम हो सके. लेकिन उनके मन में डर बना रहता है कि अगर अचानक मौसम बदल गया और बारिश हो गई, तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. उन्होंने कहा कि पहले ही बढ़ती महंगाई, महंगे बीज और खाद के दामों ने खेती को मुश्किल बना दिया है और अब इन नए नियमों ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है. उन्हें लगता है कि व्यवस्था को आसान बनाने के बजाय और जटिल बना दिया गया है.
किसान अपने तीन नॉमिनी दर्ज कर सकते हैं
वहीं इस मामले में अंबाला शहर मार्केट कमेटी बोर्ड के चेयरमैन जसविंदर सिंह ने कहा कि इस बार मंडी में व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है और वे समय-समय पर निरीक्षण भी करते रहते हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. उन्होंने बताया कि गेट पास के लिए किसान अपने तीन नॉमिनी दर्ज कर सकते हैं, जिनके फिंगरप्रिंट से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.
इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से ही गेहूं का वजन किया जा रहा है
उन्होंने बताया कि अब तक अनाज मंडी में लगभग 87,000 क्विंटल गेहूं पहुंच चुका है, जिसमें से 18,000 क्विंटल का उठान हो चुका है. उन्होंने कहा कि तेजी से उठान कार्य किया जा रहा है, ताकि किसानों के खातों में जल्द भुगतान हो सके. साथ ही, सरकार के निर्देशानुसार इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से ही गेहूं का वजन किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो. यदि किसी किसान को कोई परेशानी होती है, तो वह मार्केट कमेटी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है, जिसका समाधान जल्द किया जाएगा.
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