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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रहीं हैं, लेकिन पात्रों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण आधा साल बीतने के बावजूद वर्ष 2023 के लिए जिले में श्रेष्ठ लिंगानुपात वाले गांव जांडली खुर्द की तीन बेटियों को सम्मान मिलने का इंतजार है जबकि यह अवाॅर्ड राशि मार्च में संबंधित गांव की बेटियों को मिल जानी चाहिए थी।
इसमें हो रही देरी की वजह ये है कि इस भुगतान की फाइल सिविल सर्जन कार्यालय से एडीसी कार्यालय के बीच घूम रही है। इस बीच दो बार आचार संहिता लग चुकी है। पहले लोकसभा चुनाव के कारण लगी आचार संहिता बाधक थी लेकिन बीच में यह बाधा हटने के बावजूद लड़कियों को डेढ़ लाख की अवाॅर्ड राशि नहीं दी गई जबकि इसका बजट भी आ चुका है। बताया जा रहा है कि इस फाइल की बजट पर एडीसी कार्यालय ने आपत्ति लगाई है।
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गांव का रहा है 1,484 लिंगानुपात :
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में गांव जांडली खुर्द का सबसे ज्यादा लिंगानुपात रहने पर श्रेष्ठ गांव के अवाॅर्ड के लिए चयन किया है। गांव का लिंगानुपात 1,484 रहा है। यहां पर पिछले साल 31 लड़के और 46 लड़कियों ने जन्म लिया है। गांव की जनसंख्या 5,530 है। मेरिट के आधार पर कक्षा दसवीं में पिछले साल सबसे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाली तीन लड़कियों दिव्या पुत्री बलवान सिंह को 75,000 रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाली अंजना पुत्री सुभाष चंद्र को 45,000 रुपये और तीसरे स्थान पर रहनी वाली छात्रा सानिया पूनिया पुत्री पवन कुमार को 30,000 रुपये की राशि देकर सम्मानित किया जाना है।
ये है श्रेष्ठ गांव अवाॅर्ड योजना :
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग ने श्रेष्ठ गांव अवाॅर्ड योजना शुरू की है। इस योजना में उस गांव का चयन किया जाता है जिसका लिंगानुपात का सबसे ज्यादा होता है। ये योजना उन गांवों पर लागू होती है जिनकी जनसंख्या पांच हजार से ज्यादा होती है। चयनित गांव में दसवीं कक्षा में सबसे ज्यादा अंक पाने वाली तीन छात्राओं को मेरिट के आधार पर अवाॅर्ड देय है। प्रथम स्थान वाली छात्रा को 75,000 रुपये, द्वितीय छात्रा को 45,000 रुपये और तृतीय स्थान पर रहने वाली छात्रा को 30,000 रुपये की राशि दी जाती है।
पिछले सालों में ये रहा जिले का लिंगानुपात
वर्ष लिंगानुपात
2015 894
2016 923
2017 912
2018 893
2019 924
2020 937
2021 898
2022 950
2023 934
ये सम्मान राशि मार्च में ही मिल जानी चाहिए थी लेकिन तब से पांच माह बाद भी नहीं मिल सकी है। इसके लिए पिछले दिनों ग्रामीण जिला उपायुक्त से भी मिले थे, लेकिन समाधान नहीं हो सका। – सुभाष चंद्र, अंजना के पिता।
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इस योजना के लिए कार्यक्रम तय था, लेकिन पिछले दिनों एक रैली होने के कारण इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद आचार संहिता लग गई। आचार संहिता हटने के बाद सम्मानित किया जाएगा। – डॉ. महेंद्र भादू, सिविल सर्जन।
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यह सम्मान पांच माह पहले मिल जाना चाहिए था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से हम कई बार मिल चुके हैं। उनका कहना है कि इस योजना के तहत जिला प्रशासन सम्मानित करेगा। – बलवान सिंह, छात्रा दिव्या के पिता।
फोटो नंबर 01
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Sirsa News: श्रेष्ठ लिंगानुपात वाले गांवों की बेटियों को इस साल नहीं मिला सम्मान


