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-दोनों राज्यों को 16 सितंबर तक स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश
-जेलों में स्टाफ की कमी पर हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा व पंजाब की जेलों में मेडिकल स्टाफ की कमी के चलते कैदियों के स्वास्थ्य के पड़ रहे प्रभाव पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह 16 सितंबर तक हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर कर यह बताएं कि जेलों में मेडिकल ऑफिसर के पद भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब सरकार को अगली सुनवाई पर डाक्टरों व मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों का ब्योरा सौंपने का भी आदेश दिया है। इसके साथ ही दोनों को यह भी बताना होगा कि इन पदों को भरने को लेकर सरकार की क्या योजना है।
पंजाब की जेल में एक कैदी की मौत का मामला पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष पहुंचा था। इस मामले का संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई आरंभ की थी। पिछली सुनवाई पर सिंगल बेंच के समक्ष बताया गया कि इसी प्रकार का मामला खंडपीठ के समक्ष भी विचाराधीन है और ऐसे में जस्टिस विनोद भारद्वाज ने यह केस मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था। बेंच ने पूर्व में हरियाणा सरकार की ओर से सौंपे गए हलफनामे का अध्ययन किया। इसमें कोर्ट ने पाया कि जेल में 80 प्रतिशत मेडिकल स्टाफ के पद रिक्त पड़े हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि जेल में कैदियों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी अनिवार्य हैं और उन्हें इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। ऐसे में अगली सुनवाई पर हरियाणा व पंजाब सरकार बताएं कि जेलों में मेडिकल स्टाफ के कितने स्वीकृत पद हैं, इन पदों में से कितने रिक्त हैं और इन रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार के पास क्या योजना है। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई थी कि पंजाब की जेलों में सर्वे के दौरान 43 प्रतिशत मरीज हेपेटाइटिस सी के शिकार पाए गए थे । इस पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए हरियाणा व पंजाब सरकार को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का आदेश दिया है कि हेपेटाइटिस सी के रोगियों का किस प्रकार इलाज किया जा रहा है।
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Chandigarh News: हरियाणा-पंजाब बताएं जेलों में मेडिकल ऑफिसर के पद भरने के लिए क्या कदम उठाए
