भुल्लर के ऑफिस में केजरीवाल संग फोटो, CM मान गायब: 4 साल में कभी ट्रांसपोर्ट मंत्रालय नहीं बदला; FIR के बाद भी सपोर्टर्स का शक्ति प्रदर्शन – tarn-taran News Chandigarh News Updates

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लालजीत भुल्लर के मुख्य दफ्तर के बाहर लगे बोर्ड पर आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के साथ उनकी तस्वीर। इनसेट में गगनदीप रंधावा की फोटो

पंजाब स्टेट वेयरहाउस कारपोरेशन के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा के सुसाइड केस के में मुख्य आरोपी लालजीत भुल्लर भले ही पहली बार MLA व मंत्री बने हों, लेकिन AAP के दिल्ली दरबार में उनका रसूख साफ नजर आता है। भुल्लर के तरनतारन में पट्‌टी स्थ

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यही नहीं, उनके सोशल मीडिया अकाउंट में भी केजरीवाल और पंजाब इंचार्ज मनीष सिसोदिया की फोटो है। CM यहां भी गायब है। यह भुल्लर की पार्टी में पहुंच या रसूख रहा कि 2022 में पहली बार AAP सरकार बनने के बाद वित्तमंत्री हरपाल चीमा के बाद वह इकलौते मंत्री हैं, जिनका ट्रांसपोर्ट विभाग कभी नहीं बदला गया।

भुल्लर पर रंधावा सुसाइड केस की FIR के बाद दैनिक भास्कर टीम पट्‌टी पहुंची तो ये हालात नजर आए। रंधावा के सुसाइड से पहले वीडियो यानी डाइंग डिक्लेरेशन के बावजूद पट्‌टी में उनके सपोर्टर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। वह भीड़ जुटाकर कह रहे हैं कि भुल्लर बेकसूर हैं। अगर ऐसी कोई बात थी तो उसे बैठकर सुलझाया जा सकता था।

यही नहीं, लालजीत सिंह भुल्लर का पट्टी हलके में इतना दबदबा है कि वेयरहाउस को लेकर हुए विवाद में कोई भी उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। कोई यह तक बताने को तैयार नहीं कि उनके पिता सुखदेव भुल्लर जहां गोदाम लेना चाहते थे, वह जमीन आखिर है कहां?

हलका पट्टी में दफ्तर के बाहर लोगों से मिलते हुए लालजीत भुल्लर और मुख्य गेट पर लगे बोर्ड से मुख्यमंत्री भगवंत मान की फोटो गायब।- फाइल फोटो

FIR के बाद भुल्लर के घर शक्ति प्रदर्शन

भास्कर टीम रविवार को जब पट्‌टी मे लालजीत भुल्लर के घर पहुंची तो वहां एक पुलिस कर्मी तैनात था। जब उनसे लालजीत सिंह भुल्लर व सुखदेव सिंह भुल्लर के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि यहां नहीं हैं। समर्थक आए तो उन्होंने भी भुल्लर के बारे में जानकारी न होने की बात कही। लालजीत के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की सूचना मिलते ही उनके समर्थक पट्‌टी में एकत्रित होने लगे। समर्थक पहले दाना मंडी में जमा हुए और उसके बाद उनके घर पहुंचे।

लालजीत भुल्लर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बर्खास्त कर दिया इसके बावजूद उसके समर्थक उसे मंत्री ही मान रहे हैं। समर्थक मीडिया और लोगों के सामने बार बार कहते रहे कि मंत्री साहब बेकसूर हैं और जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा। भुल्लर की मां को मीडिया के सामने पेश किया गया लेकिन कुछ बुलवाए बगैर अंदर भेज दिया। भुल्लर की ताकत दिखाने के लिए समर्थकों ने भीड़ जुटाकर जरूर संकेत दिया कि वह भी झुकने वाले नहीं हैं।

हलका पट्टी में अपने दफ्तर के बाहर लोगों से मिलते हुए लालजीत भुल्लर।- फाइल फोटो

हलका पट्टी में अपने दफ्तर के बाहर लोगों से मिलते हुए लालजीत भुल्लर।- फाइल फोटो

टेंडर की जमीन कहां है बताने को कोई तैयार नहीं

टेंडर लेने के लिए भुल्लर के पिता सुखदेव भुल्लर ने जो जमीन रिकार्ड में विभाग को लिख कर दी थी वह जमीन कहां है इस पर कोई भी पट्टी निवासी या अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। किसी को नहीं पता कि ये जमीन कहां है। इस बारे में AAP समर्थक ही नहीं बल्कि विरोधी दलों के नेता व कार्यकर्ता भी कतराते नजर आए। साफ है कि भले ही भुल्लर को मंत्रीपद से हटा दिया गया हो लेकिन लोगों को डर है कि सरकार AAP की है, भुल्लर अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए, ऐसे में उनकी वापसी हो गई तो फिर दिन काटने मुश्किल हो जाएंगे।

दिल्ली दरबार में पहुंच, विभाग नहीं बदल पाए

भगवंत मान सरकार में सिर्फ दो मंत्री ही ऐसे हैं जिनके पास कुछ महकमे सरकार बनने के पहले दिन से हैं। वित मंत्री हरपाल चीमा का विभाग भी भगवंत मान ने कभी नहीं बदला क्योंकि चीमा के भी दिल्ली दरबार में अच्छे संबंध माने जाते हैं। चीमा के बाद लालजीत भुल्लर दूसरे ऐसे मंत्री हैं जिनके पास ट्रांसपोर्ट महकमा पहले दिन से है।

19 मार्च 2022 को भुल्लर को परिवहन और हॉस्पिटैलिटी विभाग दिया गया । 5 जुलाई 2022 को हॉस्पिटैलिटी विभाग वापस लिया गया । यह सीएम भगवंत मान को दिया गया। फिर केवल ट्रांसपोर्ट मंत्री रहे। 16 मार्च 2023 को उन्हें खाद्य प्रसंस्करण का नया विभाग दिया गया । 31 मई 2023 को वह पद वापस लिया गया।

इसके बदले ग्रामीण विकास और पंचायत का नया विभाग दिया गया। अब ट्रांसपोर्ट व ग्रामीण विकास और पंचायत इनके पास आ गया। 23 सितंबर 2024 कैबिनेट विस्तार हुआ। ग्रामीण विकास और पंचायत का विभाग वापस लिया गया और उसकी जगह जेल विभाग दिया गया। हालांकि ट्रांसपोर्ट विभाग उनसे कभी वापस नहीं लिया गया।

आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के साथ लालजीत भुल्लर की तस्वीर।

आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के साथ लालजीत भुल्लर की तस्वीर।

भुल्लर पर केस से तरनतारन में बिखरी आप की राजनीति

भुल्लर के इस्तीफे के बाद तरनतारन जिले में AAP की राजनीति बिखर गई है। खडूर साहिब से AAP विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा की विधायकी पर उसमां कांड में सजा होने के बाद से तलवार लटक रही है। अब तरनतारन के 4 में से 2 हलकों में AAP के टॉप नेता जनता से दूर हो गए हैं। इसका विरोधियों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदा मिलना तय है। फिर चाहे कांग्रेस हो, अकाली दल हो या फिर वारिस पंजाब दे पार्टी।

AAP के लिए अब तरनतारन से हरमीत सिंह संधू और खेमकरण से सरवण सिंह धुन्न ही जिले में बड़े नेता रहेंगे, लेकिन ये दोनों नेता अकाली दल से जुड़े रहे हैं। दूसरी तरफ भुल्लर की पट्टी स्थिति जिस कोठी में बने दफ्तर में गगनदीप सिंह रंधावा को बुलाकर रिश्वत लेने का वीडियो बनाया गया, वहां के दरवाजे अब बंद हैं। भुल्लर अंडरग्राउंड हैं, जबकि परिवार चंडीगढ़ में हैं।

भुल्लर इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। 2023 में तरनतारन के तत्कालीन AAP के विधायक दिवंगत डॉ. कश्मीर सिंह सोहल ने कई बार खुलेआम आरोप लगाए थे कि भुल्लर उनके हलके में दखलअंदाजी कर रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा था कि तरनतारन नगर काउंसिल चुनाव के दौरान भुल्लर ने हस्तक्षेप कर उनकी पत्नी को हराने में अहम भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा रामगढ़िया बिरादरी को लेकर की गई टिप्पणी भी काफी विवादों में रही, लेकिन सरकार में मजबूत मंत्री होने के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं एक NRI की जमीन हड़पने का मामला भी काफी चर्चित रहा।

भुल्लर के बारे में सियासी और कानूनी जानकारों का मानना है कि शायद अब वह दोबारा कैबिनेट में जगह न बना पाएं। गगनदीप रंधावा की आत्महत्या मामले में जहां सभी विपक्षी दल एकजुट हो गए हैं, वहीं आम जनता में सरकार के खिलाफ नाराजगी है।

पहले भी इन विवादों में रहे लालजीत भुल्लर

मंत्री लालजीत भुल्लर पहली बार विवादों में नहीं फंसे, इससे पहले भी वह लाल किला हिंसा, जातिवादी टिप्पणी से लेकर मंत्री बनते ही स्टंटबाजी को लेकर वह सुर्खियों में रह चुके हैं। हालांकि हर बार उन्हें पार्टी और सरकार का साथ मिलता रहा। कभी सफाई देकर तो कभी माफी मांगकर वह हमेशा बचते रहे। हालांकि इस बार वह सीधे अफसर के सुसाइड केस में फंस गए।

  • लाल किला हिंसा के वक्त दीप सिद्धू के साथ वीडियो हुआ था वायरललालजीत सिंह भुल्लर 26 जनवरी, 2021 को लाल किले पर हुई हिंसा के दौरान एक पुराने वीडियो में दिखने के कारण विवादों में घिर गए थे। इस वीडियो में उन्हें दीप सिद्धू के साथ ‘निशान साहिब’ फहराते हुए कथित तौर पर देखा गया। इसके बाद विपक्षी दलों (कांग्रेस, भाजपा) ने उन पर गंभीर सवाल उठाए। अगस्त 2022 में यह वीडियो वायरल हुआ, जिसमें AAP नेता भुल्लर लाल किले की हिंसा के समय मौजूद थे।विपक्ष ने आरोप लगाया कि भुल्लर किसान आंदोलन के दौरान कट्टरपंथियों का समर्थन कर रहे थे, जबकि राज्य सरकार तिरंगा अभियान चला रही थी। उस समय लालजीत भुल्लर ने सफाई देते हुए कहा कि वह एक किसान के बेटे के रूप में दिल्ली गए थे और उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। विपक्षी दलों ने उनकी बर्खास्तगी की मांग की थी जबकि भुल्लर ने आरोप लगाने वाले नेता पर पलटवार करते हुए उनके पिता के खालिस्तान समर्थक होने का मुद्दा उठाया।
  • ट्रासपोर्ट मंत्री बनकर गाड़ी से किए स्टंटकरीब 4 साल पहले मंत्री बनते ही लालजीत सिंह भुल्लर का खतरनाक स्टंट सामने आया था। वह अपनी एंडेवर गाड़ी के सनरूफ से बाहर निकलकर हाथ हिलाते दिख रहे थे। यह वीडियो नेशनल हाईवे पर बनाया गया था। गाड़ी तेज रफ्तार में चल रही थी और उनके दो गनमैन भी गाड़ी के दरवाजे के शीशे खोलकर बाहर की ओर जान को खतरे में डालकर लटके हुए थे।इस मामले में भुल्लर ने कहा कि यह वीडियो पुराना है। जब वह चुनाव जीते थे, तब यह वीडियो बना था। हालांकि, उनके साथ गनमैन और आगे चल रही दो पायलट गाड़ियों को देखकर उनके इस दावे पर भी सवाल खड़े हुए थे। उस समय वह ट्रांसपोर्ट मंत्री थे। उन्होंने सफाई दी कि यह वीडियो पुराना है और जब वे जीते थे, तब उन्हें हार पहनाए गए थे। उसके बाद उन्हें कभी हार नहीं पहनाए गए। हालांकि, मंत्री के आगे चल रही दो पायलट जिप्सियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उस वक्त पुलिस प्रशासन उन्हें छोड़ने आया था।
  • स्वर्णकार समुदाय पर टिप्पणी कीभुल्लर ने खडूर साहिब लोकसभा चुनाव 2024 में प्रचार के दौरान पट्टी (तरनतारन) में पार्टी मीटिंग में पूर्व कांग्रेस विधायक हरमिंदर सिंह गिल पर हमला करते हुए रामगढ़िया और सुनियारा (स्वर्णकार) समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक/जातिवादी टिप्पणियां कीं। उन्होंने खुद को “लाहौरिया जट्ट” बताते हुए कहा कि “मैं लाहौरिया जट्ट हूं, सुनियारा नहीं।”हरमिंदर गिल को संबोधित करते हुए भुल्लर ने कहा था- ‘तुम्हारी तरह कोई गुल्ली सुनियारा नहीं… यहां हर कोई गुल्ली घर सुनियारा बुलाता है।’ इसे जातिवादी माना गया। उस समय विपक्षी दल (शिअद और कांग्रेस) ने उन पर FIR दर्ज करने, गिरफ्तारी और मंत्री पद से हटाने की मांग की थी। मामला चुनाव आयोग तक भी पहुंचा था।मगर, बाद में उन्होंने वीडियो जारी कर माफी मांग ली थी। साथ ही कहा कि बात सिर्फ हरमिंदर गिल पर थी, किसी बिरादरी पर नहीं। रामगढ़िया संगठनों (जैसे ऑल विश्वकर्मा रामगढ़िया फाउंडेशन) ने असंतुष्ट रहते हुए AAP का बहिष्कार करने का आह्वान किया। कुछ जगहों पर उनका पुतला भी जलाया गया।

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