मेरा गांव मेरी शान: बहुअकबरपुर का है 900 वर्षों का इतिहास, फीजी देश का प्रधानमंत्री बन चुका है इस गांव का शख्स Latest Haryana News

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रोहतक शहर से 12 किलोमीटर दूर स्थित बहुअकबरपुर (भाऊ अकबरपुर) गांव की पहचान यहां का गौरवशाली इतिहास, शौर्य और आस्था है। करीब 900 वर्षों का इतिहास समेटे इस गांव की वर्तमान जनसंख्या लगभग 16000 है। जिसमें 8600 से अधिक मतदाता है।

रोहतक-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-9 पर स्थित यह गांव राजनीति के अलावा अपनी समृद्ध परंपराओं, सामाजिक एकता के रूप में जाना जाता है। रोहतक खंड की यह सबसे बड़ी पंचायत है। जिसमें सरपंच के अलावा 20 पंच हैं। गांव में रहने वाले परिवारों की संख्या लगभग 5000 है। यह गांव विधानसभा क्षेत्र महम और लोकसभा क्षेत्र रोहतक में शामिल है। गांव की खाप का नाम भाऊ अठगामा है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सहित गांव में दो सरकारी स्कूल हैं। दो स्कूल संस्था संचालित व दो अन्य निजी स्कूल हैं। गांव में नौ आंगनबाड़ी केंद्र हैं। गांव में तीन बैंक, पुलिस थाना व ताऊ देवीलाल के नाम से पार्क भी है। कृषि प्रधान गांव में अलग-अलग समुदायाें की चौपालें हैं। गांव में छह तालाब हैं। यहां शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, रविदास मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, बाबा जीवन दास डेरा व अखाड़ाें के अलावा एक जिम भी है।


19 मई 1999 को फीजी देश के प्रधानमंत्री बने चौधरी महेंद्र सिंह बल्हारा मूल रूप से बहुअकबरपुर के ही थे। वे अंतरराष्ट्रीय लेबर यूनियन के प्रथम भारतीय अध्यक्ष भी रहे थे। ग्रामीण कहते हैं कि उनका परिवार 1902 में फीजी चला गया था। वर्ष 2004 में भारत सरकार ने उनको प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित भी किया था। नगर निगम रोहतक के मेयर रामअवतार वाल्मीकि का पैतृक गांव भी यही है।


इसी गांव के शमशेर सिंह कुंडू सेना में मेजर जनरल के पद पर पहुंचे थे। उनके अलावा मेजर जनरल जोगेंद्र बल्हारा, लेफ्टिनेंट गोपाल सिंह कुंडू, लेफ्टिनेंट अजयबीर सिंह कुंडू, कैप्टन कपूर सिंह कुंडू, ब्रिगेडियर जंगबीर सिंह कुंडू, ब्रिगेडियर जयबीर सिंह कुंडू, रिसलदार रिसाल सिंह बल्हारा आदि ने सेना में शौर्य दिखाया।

ये है गांव का इतिहास

सत्यवान नंबरदार, पंचायत निगरानी कमेटी के प्रधान एवं पंच विजय बल्हारा, जयभगवान पंच, नवीन पंच, आशू पंच व अजय बल्हारा फुटबाल कोच का कहना है कि गांव के इतिहास के अनुसार चौधरी बलिया बल्हारा और उनका भाई गुसाईं बल्हारा की ढाणी से खेती योग्य उपजाऊ भूमि और पानी के श्रोत की खोज मे दादरी के पास देबी ढाणा नामक स्थान से सन 1227 में आकर यहां दादा गुसाईं आला खेड़ा के पास बसे थे। उनकी निकासी बलहारा की ढाणी नामक गाँव से हुई थी जो की वर्तमान में जिला भिवानी, हरियाणा में है। चौधरी गुसाईं को कोई संतान नहीं थी और चौधरी बलिया बल्हारा को नेम सिंह, भाऊ और पानु नामक तीन पुत्र थे।

गांव का इतिहास 900 साल पुराना है। सेना, पुलिस, खेल, राजनीति व कला संस्कृति में भी ग्रामीणों ने यहां का नाम रोशन किया है। वर्तमान में ग्रामीणों के सहयोग से ग्राम पंचायत की ओर से गांव में अनेक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। – प्रवीन देवी, सरपंच गांव बहुअकबरपुर

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मेरा गांव मेरी शान: बहुअकबरपुर का है 900 वर्षों का इतिहास, फीजी देश का प्रधानमंत्री बन चुका है इस गांव का शख्स