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उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में हरियाणा में भिंडावास और सुल्तानपुर झील ही रामसर साइट के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। मसानी बैराज में भी वह क्षमता है कि उसी तर्ज पर विकसित किया जा सके।
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