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फतेहाबाद। भले ही प्रदेश सरकार जिले में खेलों को बढ़ावा देने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति काफी चिंताजनक है। जिले में मात्र 10 खेलों के लिए ही 16 प्रशिक्षक उपलब्ध हैं। जूडो प्रशिक्षक अमित कुमार की तैनाती इसी साल फरवरी में हुई है। इसके बाद अब खेल स्टेडियम में उनके पास 20 युवाओं ने प्रशिक्षण लेना शुरू किया है।
कुछ खेलों के दो से अधिक कोच हैं, लेकिन अन्य खेलों के लिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षक न मिलने के कारण निजी अकादमियों में पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
जिले के खेल स्टेडियम में कुश्ती और हॉकी खेल के प्रशिक्षक उपलब्ध होने के कारण जिले में कुश्ती और हॉकी के खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीयस्तर पर पदक जीते हैं। जिला मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित गांव भोडि़याखेड़ा की खिलाड़ी राजबाला जॉर्डन देश में सब जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलने के लिए 21 अगस्त को रवाना हुईं हैं।
जिले में हॉकी के तीन प्रशिक्षक उपलब्ध होने के कारण साल 2023 के सीएम कप में हॉकी टीम का अच्छा प्रदर्शन रहा। आत्मरक्षा के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाले कराटे सिखाने के लिए जिले में कोई सरकारी कोच नहीं है। मुक्केबाजी खेल के लिए जिला मुख्यालय पर सिर्फ एक ही खेल नर्सरी है।
इस खेल नर्सरी के कई खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन कर पदक पाए हैं। नर्सरी की खिलाड़ी सुखरीत ने मार्च में नोएडा में आयोजित नेशनल सब जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। नर्सरी के कई खिलाड़ी राज्यस्तर पर पदक पा चुके हैं।
निजी अकादमियों के सहारे शूटिंग, शतरंज के खिलाड़ी
जिला मुख्यालय पर शूटिंग और शतरंज की निजी अकादमी संचालित हैं। इन अकादमी में कई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। शूटिंग प्रशिक्षक अनिल कुमार की निजी अकादमी के कई खिलाड़ी राष्ट्रीयस्तर की प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। फतेहाबाद से 20 से अधिक अन्य खिलाड़ी शतरंज समेत राष्ट्रीयस्तर की कई प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं।
मैंने गांव भोडियाखेड़ा के खेल स्टेडियम में कोच अनिल कुमार से प्रशिक्षण लेकर राष्ट्रीयस्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। अगर जिले में सभी खेलों के प्रशिक्षक होंगे तो जिले से सभी खेलों के खिलाड़ियों को मार्गदर्शन मिल सकेगा। इससे जिले को मिलने वाले पदकों में बढ़ोतरी होगी।
– राजबाला, कुश्ती खिलाड़ी एवं निवासी भोडियाखेड़ा।
मैं कई साल से मुक्केबाजी खेल रही हूं। मार्च में मैंने नोएडा में नेशनल सब जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। फतेहाबाद में सिर्फ एक ही जगह मुक्केबाजी का प्रशिक्षण मिलता है। अगर गांव या खेल स्टेडियम पर मुक्केबाजी के प्रशिक्षक होंगे तो जिले के कई खिलाड़ी उभर कर आएंगे और पदक पा सकते हैं।
– सुखरीत, मुक्केबाज।
मैं शहर की जाट धर्मशाला में बनी निजी शूटिंग अकादमी में काफी सालों से प्रशिक्षण ले रहा हूं। मुझे दो बार राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला और दोनों ही बार मुझे खेल में शानदार प्रदर्शन करने पर स्वर्ण पदक मिले। सरकारी स्तर पर हर खेल के कोचों की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए।
– मोहब्बत पाल, शूटिंग खिलाड़ी निवासी, फतेहाबाद।
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