{“_id”:”67c354558f3283df0707d9d7″,”slug”:”after-holi-festival-labor-auspicious-work-will-be-banned-kharmas-will-start-jind-news-c-199-1-jnd1002-130809-2025-03-02″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Jind News: होली पर्व के बाद लगेगी मांगलिक कार्यों पर रोक, खरमास होगा शुरू”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
01जेएनडी19-जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री। स्रोत स्वयं
जींद। होली पर्व के बाद मांगलिक कार्यों पर रोक लगने जा रही है। 13 मार्च को होली का पर्व है और इसके बाद 14 मार्च को खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास में मांगलिक कार्य पूरी तरह से बैन हो जाते हैं। एक माह बाद 13 अप्रैल को खरमास समाप्त होगा। इसके बाद ही मांगलिक कार्य शुरू होंगे। ऐसे में मार्च माह में मांगलिक कार्यों के लिए 11 दिन ही शेष बचे हैं। इन दिनों में अगर किसी ने विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य करने है तो वो कर सकते हैं। अगर इस अवधि में ऐसा नहीं किया जाता है तो फिर एक माह बाद 13 अप्रैल को खरमास समाप्त होने पर ही मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। 13 मार्च को रात 10 बजकर 37 मिनट के बाद से पूर्णिमा लग रही है। इसी दिन होलिका दहन होगा। 14 मार्च को होली मनेगी। खरमास के अवधि में सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए शुभ कार्यों पर रोक रहती है।
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इस वर्ष अप्रैल से दिसंबर तक कुल 42 शुभ विवाह मुहूर्त हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार खरमास समाप्त होने के बाद विवाह के लिए सर्वोत्तम तिथियां अप्रैल 2025 में 14 अप्रैल, 16 अप्रैल, 18 अप्रैल, 19 अप्रैल, 20 अप्रैल, 25 अप्रैल, 29 अप्रैल और 30 अप्रैल रहेगी। मई माह में विवाह के मुहूर्त 5 मई, 6 मई, 7 मई, 8 मई, 13 मई, 17 मई, 28 मई होंगे। जून में विवाह के मुहूर्त 1 जून, 2 जून, 4 जून, 7 जून, 8 जून, 9 जून, 10 जून, 11 जून से गुरु अस्त होने के कारण विवाह पर रोक लग जाएगी। छह जुलाई से देव शयन दोष लग जाएगा। इसके कारण 21 नवंबर तक विवाह नहीं होंगे। 22 नवंबर से पुन: शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। नवंबर 2025 में विवाह के मुहूर्त 22 नवंबर, 23 नवंबर, 25 नवंबर, 30 नवंबर, दिसंबर 2025 में विवाह के मुहूर्त 4 दिसंबर और 11 दिसंबर रहेगा।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि इस साल फरवरी से दिसंबर तक कुल 42 विवाह मुहूर्त हैं। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक शुरू होता है। यह फाल्गुन पूर्णिमा मतलब होलिका दहन तक रहता है। इस दौरान शादी, मुंडन, नामकरण, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस अवधि में सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए शुभ कार्यों पर रोक रहती है।