रघुराम राजन का कॉलम: एआई की क्षमताओं को लेकर ज्यादा मायूस ना हों Politics & News

[ad_1]


इक्विटी-रिसर्च फर्म सिट्रिनी ने हाल ही में वित्तीय बाजारों में तब हलचल मचा दी थी, जब उसने एक ऐसा परिदृश्य प्रस्तुत किया, जिसमें 2028 तक एआई अधिकांश व्हाइट-कॉलर नौकरियों को खत्म कर देगा। जाहिर है इसके अर्थव्यवस्था पर भी गम्भीर परिणाम होंगे। लेकिन यह पूर्वानुमान कुछ पहलुओं में अत्यधिक निराशावादी है। सॉफ्टवेयर जैसे कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें तो एआई को अपनाने में आने वाली बाधाएं और इससे निर्मित होने वाली इन​र्शिया (जड़ता) बदलावों की गति को संभवतः धीमा करेंगी। इतिहास में हमेशा से ही ऐसा ही रहा है। उदाहरण के लिए, 1920 के दशक में ही ऑटोमैटेड टेलीफोन एक्सचेंज संभव हो चुके थे, लेकिन इससे अमेरिका में टेलीफोन ऑपरेटरों की नौकरी 1980 के दशक तक नहीं गई थी। इसके अतिरिक्त, टेक्नोलॉजी अपने आपमें केवल एक वैरिएबल होती है। इसके चारों ओर ऐसी प्रक्रियाएं और संरचनाएं भी होनी चाहिए, जो ग्राहकों को विश्वसनीय सेवा का आश्वासन दें। यही वह क्षेत्र है, जहां स्थापित कंपनियों को नए प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिलती है, भले ही वे नवीनतम तकनीक का उपयोग न कर रही हों। और अगर स्थापित कंपनियां अपनी जगह खो देती हैं, तब भी एआई-प्रेरित लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि से उत्पन्न नए अवसर एआई पर निर्भरता तक ही सीमित नहीं होंगे। वे मानव-श्रम की भी आवश्यकता पैदा कर सकते हैं- जैसा कि इंटरनेट और इन्फ्लुएंसर्स के उदय के साथ देखा गया है। फिर भी, एक ऐसे भविष्य की कल्पना करें, जहां कुछ विशिष्ट प्लेटफॉर्म (जैसे एंथ्रोपिक या मेटा) एआई के ऐसे स्तर तक पहुंच जाएं, जो उन्हें प्रतिस्पर्धा से आगे निकलने और यूजर-कंपनियों से लगातार ऊंची कीमतें वसूलने में सक्षम बना दें। ये प्लेटफॉर्म तब भारी मुनाफा अर्जित करेंगे, जिससे उनके कर्मचारियों (जो संख्या में कम होंगे, क्योंकि एआई छंटनी कर चुका होगा!) और उनके शेयरधारकों की आय बढ़ेगी। साथ ही, उनकी सेवाओं पर निर्भर अनेक कंपनियां भी भुगतान करने को तैयार होंगी, क्योंकि एआई उनकी उत्पादकता बढ़ाएगा और उन्हें अधिक व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों को हटाने की अनुमति देगा। इसके बाद बेरोजगार हुए ये कर्मचारी उन आस-पास के क्षेत्रों में काम की तलाश करेंगे, जहां एआई ने अभी उनकी स्किल्स को अप्रासंगिक नहीं बनाया है। लेकिन यदि ऐसे रोजगार सीमित हुए, तो वे बागवान, वेटर और शॉप-असिस्टेंट्स जैसे काम करेंगे, जिससे इन पेशों में वेतन और नीचे चला जाएगा। यदि यह मानें कि एआई पहले संज्ञानात्मक कार्यों को समाप्त करता है, बनिस्बत स्किल्ड फिजिकल कार्यों के- तो मशीनिस्ट, प्लम्बर और राजमिस्त्री जैसे पेशों में कुछ समय तक काम बना रह सकता है, जब तक कि रोबोट इन कार्यों के लिए पर्याप्त उन्नत न हो जाएं। या एक और ऐसे प्रतिस्पर्धी परिदृश्य पर विचार करें, जिसमें कोई भी प्लेटफॉर्म विजेता नहीं बनता है, क्योंकि चैटजीपीटी 33.2, जेमिनाई 25 और अन्य सभी के बीच बहुत कम अंतर होता है। इसमें एआई की कीमतें कम रहेंगी और उत्पादकता के लाभ पूरी इकोनॉमी में फैलेंगे, साथ ही उससे उत्पन्न मुनाफा भी। एआई पर भारी खर्च से बचते हुए, यूजर कंपनियां कीमतें घटा सकती हैं और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ा सकती हैं, जिससे अन्य क्षेत्रों में अधिक रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं। इसमें पहले वाले परिदृश्य की तुलना में तकलीफें कहीं कम होगी, क्योंकि सस्ती वस्तुएं और सेवाएं पहले से मौजूद श्रमिक बचत को अधिक दूर तक ले जा सकेंगी।
न केवल वर्तमान रुझान यह संकेत देते हैं कि यह दूसरा सिनैरियो अधिक संभावित है, बल्कि सरकारें यह सुनिश्चित करने के लिए कदम भी उठा सकती हैं कि यही परिदृश्य साकार हो। बेरोजगारी की समस्या के कोई आसान सार्वजनिक समाधान नहीं होते। इसके लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को कुछ हद तक मजबूत करना होगा। साथ ही, जहां तक सम्भव हो, व्यवसायों को भी जॉब्स क्रिएट करने और कामगारों को री-स्किल करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।
(@प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

[ad_2]
रघुराम राजन का कॉलम: एआई की क्षमताओं को लेकर ज्यादा मायूस ना हों