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- N. Raghuraman’s Column: Growth Is Not A Statistic, But A Mindset—One That Can Emerge Even From A Peanut Shop.
18 मिनट पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
‘क्यों नहीं आप सड़क किनारे के किसी मूंगफली वाले के पास बैठ कर उससे पूछें कि उसका रोजाना का टर्नओवर कितना है? मान लें कि वह कहता है 350 रुपए, तो उसके साथ बैठकर इसे 700 रुपए तक बढ़ाने की योजना बनाएं। यह किसी भी बिजनेस को 100% बढ़ाने पर फोकस करने का पहला कदम होगा। ऐसा करके आप पैसे, मुनाफे और ग्रोथ का एक साथ अनुभव करेंगे।
अगर मूंगफली वाला न मिले तो किसी स्नैक स्टॉल में बैठकर उसके मालिक को व्यवसाय दोगुना करने में मदद करें।’ दशकों से यह सलाह मैं उन सभी एमबीए स्टूडेंट्स को देता आया हूं, जो तीसरे सेमेस्टर में होते हैं और प्लेसमेंट से पहले चौथे सेमेस्टर में किसी कंपनी में इंटर्नशिप करने जाते हैं।
इस एक्सरसाइज की वजह यह है कि हर एमबीए छात्र को इतना सक्षम होना चाहिए कि वह किसी बिजनेस की स्थिति और ग्रोथ की संभावनाओं को देख कर उसमें अवसर और पैसे कमाने के तरीके पहचान सके। जिन स्टूडेंट्स ने यह सरल अभ्यास अपनाया, उन्होंने उन छात्रों की तुलना में कॅरिअर में बहुत बेहतर किया, जिन्होंने इसे बुनियादी और देसी कहकर नजरअंदाज कर दिया।
जो लोग अब भी इस एक्सरसाइज को साधारण मानते हैं, उन्हें मैं आमंत्रित करता हूं कि वे मुंबई की प्रीमियम यूनिवर्सिटी- नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस)- के एमबीए छात्रों द्वारा हासिल परिणाम देखें। उन्होंने एक साधारण वड़ा पाव स्टॉल का नाम बदलकर उसके मालिक की किस्मत बदल दी। ये कहानी है मुंबई के विले पार्ले में वड़ा पाव स्टॉल चलाने वाले बोरुन साहा की, जहां आसपास कई सारे कॉलेज हैं।
साहा का स्टॉल मुंबई में मौजूद सैकड़ों स्टॉल्स जैसा ही था। फर्क सिर्फ लोकेशन का था। वह ऐसे कॉलेज के समीप था, जहां जेन-जी मौजूद थी। एनएमआईएमएस के विद्यार्थी समारा खान, आद्या रविंद्रन, सानवी राणे, माइशा मुखर्जी, अयान अब्बागनी और हितरार्थी सावला जब ब्रांडिंग और एडवरटाइजिंग पढ़ रहे थे तो उन्होंने भी ‘थिंक आउट ऑफ द बॉक्स’ जैसा पुराना डायलॉग सुना।
लेकिन इस ग्रुप ने सच में ऊपर बताए गए सुझाव पर अमल शुरू कर दिया। उनका क्लास असाइनमेंट था- ‘किसी लोकल बिजनेस को पूरी तरह बदल देना।’ ग्रुप ने ऐसा कोई बिजनेस खोजने की ठानी। आखिरकार, वे उसी स्टॉल पर पहुंचे, जहां अकसर मिला करते थे। उन्हें आइडिया आया कि हर कॉलेज का एक पसंदीदा स्नैक स्पॉट होता है। और जिस स्टॉल पर वे जाते थे, वही उनकी लैब बन गया। उन्होंने स्टॉल मालिक बोरुन साहा से बात की और वो मान गए।
क्या आप सोच सकते हैं कि वड़ा पाव विक्रेता साहा ने कभी एमटीवी पर ‘स्प्लिट्सविला’ जैसा पॉपुलर भारतीय डेटिंग रियलिटी शो देखा होगा? उन्होंने जो रील बनाई, उसे 20 लाख से ज्यादा व्यू मिले। इसमें साहा और उनके ग्राहक ‘स्प्लिट्सविला सीजन-16’ की बेहतरीन कंटेस्टेंट आकांक्षा चौधरी का समर्थन करते नजर आते हैं। शो का प्रीमियर 2026 की शुरुआत में हुआ था। मूलत: जयपुर की रहने वाली 23 साल की आकांक्षा मॉडल और इंजीनियर हैं।
क्या आप यह भी मान सकते हैं कि शायद ही ‘एक्स’ का मतलब जानने वाले साहा अपने ग्राहकों से कहते हैं कि ‘आपको आपके एक्स ने ब्लॉक कर दिया? तो आइए, वड़ा पाव खरीदिए, मैं आपको अपने फोन पर उन्हें स्टॉक करने दूंगा।’ छात्रों ने ऐसा कंटेंट तैयार किया, जिसे उनकी पीढ़ी पसंद करती है।
उन्होंने लोगो बदला और स्टॉल का नाम ‘वडावाओव’ रख दिया। आज आसपास के कॉलेजों के स्टूडेंट स्टॉल पर आते हैं और साहा के बेटे से पूछते हैं, ‘रील्स वाले भैया कहां हैं, आज आए नहीं क्या?’ पिछले 32 साल से स्टॉल चला रहे साहा ने देखा कि इन रील्स के पॉपुलर होने से उनका बिजनेस कई गुना बढ़ गया।
फंडा यह है कि विद्यार्थियों को कामकाजी दुनिया में कदम रखने और कॅरिअर की असली सफलता का स्वाद चखने से पहले छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन-ऑफलाइन प्रमोट करके अपने हाथ आजमाने चाहिए।
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एन. रघुरामन का कॉलम: ग्रोथ एक आंकड़ा नहीं माइंडसेट है, जो मूंगफली की दुकान से भी आ सकती है




