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आदर्श महिला महाविद्यालय में शनिवार को महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की सात महिला प्राध्यापिकाएं व 20 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय से बतौर मुख्य अतिथि मीडिया एवं जनसंचार विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. उमा शाह व बतौर विशिष्ट अतिथि के तौर हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका मनीषा ने शिरकत की।
प्राध्यापिका डॉ. उमा शाह ने कहा कि महिलाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए एक लंबा संघर्ष करना पड़ा। हमारी सृष्टि का आधार ही महिलाएं है। क्योंकि महिला समाज के प्रत्येक रिश्ते नाते में अपना सहयोग देती है। भारतीय संस्कृति में महिलाएं हमेशा से ही पूज्यनीय रही है। हमें किसी स्पेशल दिन महिलाओं का सम्मान न करके हर दिन उनका सम्मान करना चाहिए। यह हमारी संस्कृति में भी निहित है कि हमारे समाज में महिलाओं का सम्मान कितना सराहनीय है। बिना महिलाओं की किसी भी सृष्टि की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। महिला हमेशा यह याद रखे कि वे शक्ति की प्रतीक है। जो कि प्रत्येक क्षेत्र में विश्व का कल्याण कर सकती है। इतिहास में भी महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपना परचम लहरा चुकी है। महिलाएं किसी समाज को भविष्य की राह दिखा सकती है।
कार्यक्रम में आदर्श महिला महाविद्यालय की प्राध्यापिकाएं शीतल केडिया, डॉ. सुचेता सोनी, डॉ. अशिमा यादव, डॉ. नीरू चावला, डॉ. अनिता गाबा, अनिता वर्मा, डॉ. गायत्री सहित अनेक छात्राओं ने अपने विचार रखे। महिला प्राध्यापिकाओं ने कहा कि महिलाएं ऐसी ताकत है कि वह समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकती है। राष्ट्र के विकास में महिलाओं का महत्त्व बहुत महत्व है। स्त्री को सृजन की शक्ति माना जाता है, यानि कि स्त्री से ही मानव जाति का अस्तित्व है। हमें समय के साथ-साथ महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में ओर ज्यादा सुधार लाने की जरूरत है। ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सके, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर सके। यह वह तरीका है, जिसके द्वारा महिलाएं भी पुरुषों की तरह अपनी हर आकांक्षाओं को पूरा कर सके। महिला सशक्तिकरण वह है जिससे महिलाओं में उस शक्ति का प्रवाह होता है, जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती हैं और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती हैं। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना ही अत्यंत आवश्यक है।
शहरी क्षेत्रों की महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के अपेक्षा अधिक रोजगार शील है। बिना महिलाओं की किसी भी सृष्टि की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। महिला हमेशा यह याद रखे कि वे शक्ति की प्रतीक है। जो कि प्रत्येक क्षेत्र में विश्व का कल्याण कर सकती है। इतिहास में भी महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपना परचम लहरा चुकी है। हमारी सृष्टि का आधार ही महिलाएं है। क्योंकि महिला समाज के प्रत्येक रिश्ते नाते में अपना सहयोग देती है। भारतीय संस्कृति में महिलाएं हमेशा से ही पूज्यनीय रही है। हमें किसी स्पेशल दिन महिलाओं का सम्मान न करके हर दिन उनका सम्मान करना चाहिए।- डॉ. उमा शाह, सहायक प्राध्यापिका, मीडिया एवं जनसंचार विभाग, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी।
हमें समय के साथ-साथ महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में ओर ज्यादा सुधार लाने की जरूरत है। ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सके, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर सके। आधुनिक युग में कई भारतीय महिलाएं कई सारे महत्वपूर्ण राजनैतिक तथा प्रशासनिक पदों पर पदस्थ हैं, फिर भी सामान्य ग्रामीण महिलाएं आज भी अपने घरों में रहने के लिए बाध्य है। उन्हें सामान्य स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नही है। इसमें हमें सुधार करने की जरूरत है।
– मनीषा, सहायक प्राध्यापिका, हिंदी विभाग, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी।
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VIDEO : भिवानी में आदर्श महिला महाविद्यालय में हुआ अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन



