सोनीपत। ठंड में इजाफा होने से बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा है। बच्चे निमोनिया की चपेट में आने लगे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में नौनिहालों की ओपीडी बढ़ी है। पहले 150 तक ओपीडी होती थी, अब 200 बच्चे उपचार कराने के लिए पहुंच रहे है। अस्पताल में रोजाना निमोनिया पीड़ित 8 से 10 बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं। गंभीर रूप से पीड़ित बच्चों को बाल रोग वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।
अस्पतालों में पहुंच रहे ज्यादातर बच्चे बुखार, खांसी-जुकाम की शिकायत लेकर आते हैं लेकिन जानकारी के अभाव में परिजन अक्सर यह नहीं समझ पाते कि उनका बच्चा निमोनिया की चपेट में आ गया है। निमोनिया के शुरुआती लक्षण तेज बुखार, खांसी-जुकाम और सांस लेने में तकलीफ के रूप में दिखते हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिनके जरिए बच्चों को उपचार दिया जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजंली ने बताया कि सर्दियों में श्वसन तंत्र संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। खासकर छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं में। अगर निमोनिया में बच्चे को सांस लेने में दिक्कत नहीं होती तो उसे दवा दी जाती है।
इसमें बुखार और सर्दी-खांसी कम करने की दवा दी जाती है। साथ ही बच्चे की स्थिति के आधार पर एंटीबायोटिक दी जाती है। अगर मामला गंभीर है तो अस्पताल में भर्ती कर बच्चे का इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों पर निमोनिया का असर ज्यादा होता है। खासतौर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने और दूध पीने में दिक्कत होती है।
निमोनिया से बचाव के लिए यह जरूरी
चिकित्सक डॉ. अंजली ने बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को ठंड या ठंडी हवा लगने से बचाना चाहिए। गर्म कपड़े पहनाकर रखें। रात में सफर करने से बचें और पांच साल तक के बच्चों को खासकर ठंडी जगह से दूर रखें।
Sonipat News: ठंड बढ़ने के साथ बच्चों को होने लगा निमोनिया, अस्पताल में ओपीडी बढ़ी

