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RS चुनाव: सुभाष चंद्रा को RLP के समर्थन से गरमाई सियासत. दिव्या मदेरणा ने कहा- बेनीवाल का निर्णय किसान विरोधी, बताई ये वजह


राजस्थान राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा को आरएलपी के समर्थन के बाद प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है। आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल की धुर विरोधी कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा ने नागौर सांसद बेनीवाल पर जुबानी हमला बोला है। ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा ने कहा कि आरएलपी भाजपा की बी टीम है। बेनीवाल का निर्णय किसान विरोधी है। दिव्या ने ट्वीट कर कहा- कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों में एक रणदीप सुरजेवाला किसान परिवार से है। किसान हितैषी होते तो उनके पक्ष में मतदान का निर्णय लेते। किसान आंदोलन के बहाने बीजेपी से गठबंधन तोड़ा। अब भाजपा के उतारे गए उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को वोट देंगे। हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और। 

हनुमान बेनीवाल ने किया सुभाष चंद्रा का समर्थन 

उल्लेखनीय है कि सोमवार को आरएलपी संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सुभाष चंद्रा को समर्थन देने का ऐलान किया था। विधानसभा में आरएलपी के 3 विधायक है। आरएलपी के तीनों विधायक निर्दलीय सुभाष चंद्रा को समर्थन देंगे। बेनीवाल ने कहा कि हमने पहले ही कहा था की हम राज्यसभा में भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवार को मत नही देंगे। हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान में जंगलराज है। क्योंकि अपराध चरम पर है तथा महिला अपराध में राजस्थान एक नंबर पर आ गया और आम आदमी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। राजस्थान में बढ़ते अपराधों के लिए भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के आपसी गठजोड़ है। सत्ता में बैठे लोगो शराब माफियाओं, टोल माफियाओं, खनन माफियाओं व बजरी माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं।

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सुभाष चंद्रा की जीत पर संशय बरकरार 

मौजूदा ​संख्या बल के हिसाब से BJP एक सीट पर जीत रही है। दूसरी सीट के लिए उसे 11 वोट चाहिए। भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। सुभाष चंद्रा भी मैदान में है। भाजपा के 71 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट चाहिए। दो उम्मीदवारों के लिए 82 वोट चाहिए। भाजपा समर्थक दूसरे उम्मीदवार को जीतने के लिए 11 वोट कम पड़ रहे हैं। हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के 3 विधायकों का सपोर्ट भाजपा को मिल गया है। कुल संख्या 74 हो जाती है। फिर दूसरे उम्मीदवार के लिए 8 वोटों की कमी रहती है। कांग्रेसी खेमे में सेंध लगाकर आठ वोट का प्रबंध करने पर ही भाजपा समर्थक दूसरा उम्मीदवार जीत सकता है। कांग्रेस के रणनीतिकार कांग्रेस के 108, 13 निर्दलीय, एक आरएलडी, दो सीपीएम और दो बीटीपी विधायकों को मिलाकर 126 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। इसलिए मुकाबला बहुत रोचक है। कांग्रेसी खेमे से भाजपा कुछ निर्दलीयों और नाराज कांग्रेस विधायकों में सेंध लगाने के प्रयास में है।

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