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रोहतक। कोर्ट में दुष्कर्म पीड़िता ने कहा कि उसका कोई शारीरिक उत्पीड़न नहीं हुआ। आरोपी उसका पति है। साथ ही बेटे का पिता भी है। एएसजे शैलेंद्र सिंह की अदालत ने 27 फरवरी को साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।
अदालत में दाखिल आरोप पत्र के मुताबिक फरवरी 2024 में लड़की का पिता सिटी थाने में पहुंचा और आरोप लगाया कि उसकी 15 साल की बेटी घर से चली गई है। उन्हें शक है कि सैनिक कॉलोनी का युवक बहला-फुसलाकर ले गया है।
12 दिसंबर को लड़की को पिता थाने में लेकर पहुंचा। बताया कि उसकी बेटी को आरोपी युवक बहला-फुसलाकर पंजाब ले गया था। वहां उसकी मां ने शादी करवा दी। साथ ही दूसरे राज्य भेज दिया। 15 फरवरी 2025 को लड़की को पीजीआई रोहतक में दाखिल कराया जहां उसने लड़के को जन्म दिया। आरोपी को नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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अदालत में बोली पीड़िता-परिवार ने की सगाई, नहीं हुआ अपहरण
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कहा कि नौ जनवरी 2024 को बालिग हो गई थी। परिवार ने आरोपी के साथ उसकी सगाई कर दी। रेलवे स्टेशन से गुजरी तो वाॅशरूम के लिए ट्रेन के डिब्बे में चली गई। वहां अचानक ट्रेन चल पड़ी और नीचे नहीं उतर सकी। दिल्ली स्टेशन पर उसने आरोपी को फोन किया। बिहार जाकर दोनों ने शादी कर ली। फरवरी 2025 में उनको बेटा हुआ। किसी तरह का शारीरिक शोषण व अपहरण नहीं हुआ। माता-पिता ने भी अदालत में यहीं बयान दिए।
शारीरिक शोषण का सवाल नहीं, आरोपी बच्चे का पिता
अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि आरोपी बच्चे का पिता है, यह डीएनए रिपोर्ट से साबित हो गया है। पीड़िता ने साफ कहा है कि उस समय वह बालिग हो गई थी। किसी तरह का शारीरिक उत्पीड़न नहीं हुआ। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट से साबित हुआ है कि लड़की की उस समय उम्र 17 से 19 साल के बीच हो सकती है। ऐसे में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया जाता है।
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Rohtak News: पीड़िता ने कोर्ट में कहा- दुष्कर्म का आरोपी मेरा पति और अब बेटे का पिता, नहीं हुआ उत्पीड़न




