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नारनौल। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय ने महेंद्रगढ़ और राजस्थान के सीमावर्ती जिला झुंझुनूं के विभिन्न क्षेत्रों में खनिज संभावनाओं की तलाश के लिए टेंडर जारी किया है। इस परियोजना के तहत करीब 3.55 करोड़ रुपये की लागत से कोर ड्रिलिंग का कार्य कराया जाएगा। ऐसे में विभाग फिर से यूरेनियम व अन्य खनिज की तलाश करेगा।
इससे पहले दोचाना गांव में यूरेनियम के अन्वेषण कार्य का ड्रिलिंग और टेस्टिंग फेज चल रहा था। अब फिर से परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय ने टेंडर जारी कर दिया है। अगर यहां पर यूरेनियम पाया जाता है तो आने वाले समय में यह क्षेत्र देश के ही नहीं बल्कि विश्व के मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब होगा।
नारनौल में शहर के आसपास 20-25 दिन तक हेलिकॉप्टर से हेलिबॉर्न जियोलॉजिकल सर्वे करवाया गया था। इसके बाद से ही खनिज की तलाश की जा रही है।
10 हजार मीटर तक होगी कोर ड्रिलिंग
जारी टेंडर के अनुसार विभाग की ओर से कुल 10,000 मीटर कोर ड्रिलिंग करवाई जाएगी। यह ड्रिलिंग महेंद्रगढ़ जिले के दोचाना, ठाठवाड़ी, बदोपुर, शिमला, रायपुर और मोहनपुर क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में की जाएगी। कुछ स्थान झुंझुनूं जिले में भी शामिल किए गए हैं। इन स्थानों पर भूमिगत खनिजों की संभावनाओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाएगा।
300 से 900 मीटर तक होगी बोरहोल की गहराई
परियोजना के तहत ड्रिलिंग के लिए बोरहोल की गहराई 300 मीटर से लेकर 900 मीटर तक रखी गई है। इतनी गहराई तक ड्रिलिंग करने से जमीन के नीचे मौजूद खनिजों की सही स्थिति और मात्रा का आकलन करना संभव होगा। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद संभावित खनिज संसाधनों का पता लगाना और उनके वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर भविष्य में खनन की संभावनाओं को मजबूत करना है। इससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
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Mahendragarh-Narnaul News: महेंद्रगढ़-झुंझुनूं क्षेत्र में खनिज खोज के लिए 3.55 करोड़ होंगे खर्च


