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ये एक ऐसा शो था जिसे दर्शक न तो देखे बिना रह पाते थे और देखते-देखते भी हालत पतली ही रहती थी. बेतहाशा डर के बाद भी दर्शक इसके आने वाले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार करते थे. रामायण और महाभारत वाले दूरदर्शन के सुनहरी दौर में एक हॉरर शो भी आता था, जो टीवी का पहला हॉरर शो कहलाया. जानते हैं ये कौन सीरियल है? नहीं तो चलिए बताते हैं…
नई दिल्ली. जब भी भारतीय टेलीविजन के हॉरर शोज की बात होती है तो सबसे पहले ‘आहट’ का नाम लिया जाता है. लेकिन सच्चाई यह है कि उससे भी पहले एक ऐसा शो आया था, जिसने दर्शकों को डर का असली मतलब सिखाया. ये वो शो था जिसको देखने के बाद लोग डर सा कांप जाते थे, लेकिन रोमांच ऐसा था कि देखना मिस नहीं करते थे. इस सीरियल में सस्पेंस, डर और रोमांच का ऐसा मेल था कि इसे देखते समय दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते थे. सीमित संसाधनों और तकनीक के बावजूद इसकी कहानी, किरदार और माहौल इतना प्रभावशाली था कि लोग टीवी से नजरें नहीं हटा पाते थे. आप भी सोच में पड़ गए ना कि आखिर कौन सा है ये शो… तो चलिए बताते हैं…
आज के समय में ओटीटी से लेकर टीवी तक में 24×7 मनोरंजन की भरमार है. लेकिन 80 के दशक में मनोरंजन का एकमात्र साधन दूरदर्शन हुआ करता था. रामायण, महाभारत जैसे शोज के दौर में एक हॉरर शो आता था, जिसमें खूब सुर्खियां बटौरीं. ये धारावाहिक दूरदर्शन पर आने वाला मशहूर हॉरर शो ‘किले का रहस्य’ था, जिसने टीवी की दुनिया में हॉरर शोज की शुरुआत की थी.
इस शो ने रखी टीवी पर हॉरर शोज की नींव
‘किले का रहस्य’ ने उस दौर में डर को मनोरंजन का रूप दिया और टीवी पर हॉरर शोज की नींव रखी. इस सीरियल ने ‘आहट’ से भी पहले टीवी पर दस्तक दी थी. जिसने टीवी की दुनिया में हॉरर शोज की शुरुआत की थी. यही वजह है कि आज भी इसे याद किया जाता है.
पीयूष मिश्रा लिखा और निभाया लीड रोल
1989 में आने वाला ये शो सप्ताह में एक ही दिन आता था. हर एपिसोड में एक सस्पेंस छोड़ जाता था. ऐसे में बस दर्शकों को आने वाले हफ्ते का इंतजार रहता था और बस हर कोई यही सोचता था कि आगे क्या होगा. किले का रहस्य में मशहूर एक्टर और राइटर पीयूष मिश्रा लीड रोल में नजर आए थे और इसमें उनके साथ वीरेंद्र सक्सेना भी अहम रोल में थे.
क्या है शो की कहानी
दूरदर्शन के इस पॉपुलर शो में एक शापित और सुनसान किले की कहानी थी, जिसे लेकर कई तरह की भ्रांतियां थीं. इस किले को भुतहा बताया जाता था और कहा जाता था कि इस किले के अंदर जो भी जाता है, उसकी पीठ पर इंसानी हाथों के छाप आ जाते हैं और इसके बाद उस इंसान का अंत बहुत ही चौंकाने वाला और डरावना होता है. ये हॉरर शो दूरदर्शन पर रात 11 बजे आता था और देखने वालों में डर का माहौल होता था.
तगड़ी है IMDb रेटिंग
इस शो की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे आईएमडीबी पर 8.9 की तगड़ी रेटिंग मिली है. हॉरर शो की कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और आखिरी में एक ऐसा ट्विस्ट आता है, जिसने सबको चौंका दिया था. इस धारावाहिक की यादें आज भी उन दर्शकों के दिलों में जिंदा है, जिन्होंने 80 के दशक में इसे देखा और एंजॉय किया.
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शिखा पाण्डेय News18 Digital के साथ दिसंबर 2019 से जुड़ी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. News18 Digital से पहले वह Zee News Digital, Samachar Plus, Virat Vaibhav जैसे प्रतिष्ठ…और पढ़ें
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आहट नहीं ये है टीवी का पहला हॉरर शो, जिसे देख डर से खड़े हो जाते थे रोंगटे, IMDb पर है 8.9 रेटिंग



