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कुरुक्षेत्र। मध्यम परिवार से संबंध रख चुनौतीपूर्ण हालात में शिक्षा ग्रहण करते हुए डॉ. मंजू शर्मा ने स्वयं को अधिकारी के रूप में स्थापित करके माता-पिता के साथ जिले का नाम रोशन करने का हुनर दिखाया है। संघर्ष की कहानी ऐसी कि मन भर आए। बचपन से पोलियो से पीड़ित होते हुए दूर स्थान पर शिक्षा ग्रहण करने जाना और उसके बाद घरेलू काम के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन करना। कॉलेज तक मंजू शर्मा की यही दिनचर्या रही।
दिव्यांग होने के बावजूद शिक्षा केंद्रों तक कई किलोमीटर का सफर कभी रोडवेज, कभी निजी वाहन तो कभी पैदल भी करना पड़ा। वर्ष 1989 में 10वीं तक पढ़ाई श्री महावीर जैन सीनियर मॉडल स्कूल में और 12वीं गीता निकेतन स्कूल से 1991 में उत्तीर्ण की। परिवार के सहयोग से श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय से बीएएमएस की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद परीक्षाएं देती रही। एक दिन ऐसा आया, जब मेहनत रंग लाई और साल 2000 में उनका मेडिकल ऑफिसर के रूप में चयन हुआ। डॉ. मंजू शर्मा के 25 वर्षों के चिकित्सकीय अनुभव और उत्कृष्ट सेवा को देखते हुए साल 2025 में उन्हें पदोन्नत कर जिला आयुर्वेदिक अधिकारी नियुक्त किया गया। इस उपलब्धि तक पहुंचने का श्रेय उन्होंने माता विमला देवी और पिता जयप्रकाश शर्मा को दिया।
कुरुक्षेत्र। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ मंजू शर्मा।
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Kurukshetra News: बचपन की दिव्यांगता भी नहीं रोक पाई बड़ी सफलता का रास्ता



