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करनाल। जिले के तीन न्यायिक परिसरों में शनिवार को लगी नाै बेंच की लोक अदालत में सालों से लंबित मामलों पर विराम लग गया। विभिन्न अदालतों में 29,428 मुकदमों में से 25,920 का समाधान हो गया। इनमें न किसी की हार और न किसी की जीत हुई। सहमति के साथ निपटारा हुआ। सरकार को भी 8,94,15,712 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वाहनों के चालान संबंधी सबसे ज्यादा 23,761 मामलों का निपटान लोक अदालत में हुआ। अधिकतर चालानों का आधी से कम राशि में निपटारा हो गया। कई चालानों में ज्यादा राशि मांगी गई तो लोग बिना चालान भरे भी चले गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत में करनाल, असंध और घराैडा न्यायिक परिसर में नाै बेंच ने सुनवाई की। करनाल में छह और अन्य जगह एक-एक बेंच ने सुनवाई की। चेक बाउंस, चालान, बैंक रिकवरी, पारिवारिक मामले, श्रम विवाद, भूमि संबंधी मामले और सिविल मामले शामिल हैं। लोक अदालत में तलाक संबंधी भी कई मामले आए। आपसी सहमति से तलाक हो गया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार शारदा और प्राधिकरण की सचिव डाॅ. इरम हसन ने स्थापित बेंचों का निरीक्षण किया। डाॅ. इरम हसन ने बताया कि वर्ष 2026 की यह पहली लोक अदालत थी। लोक अदालत से सात से आठ दिन पहले संबंधित अदालत में अपने मुकदमे की सिफारिश करवाई जाती है। तभी सुनवाई लोक अदालत में की जाती है।
चालान के सबसे अधिक मामले
मोटर वाहन दुर्घटना
:
24
पारिवारिक विवाद संबंधी
:
84
चेक बाउंस
:
154
चालान
:
23761
अन्य मामले
:
1897
वर्ष 2022 के चालान का निपटारा
सेक्टर-16 निवासी नाथी राम गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2022 में वह स्कूटर पर जा रहे थे। लाल बत्ती पार करने का ऑनलाइन चालान कट गया था। चालान के भुगतान को लेकर चक्कर काटते रहे। लोक अदालत में एक हजार रुपये का चालान का 500 रुपये में भुगतान हो गया।
10 हजार का चालान 2500 में निपटा
आईटीआई के नजदीक रहने वाले सुनील कुमार ने बताया कि उनका छह नवंबर को पुलिस ने ड्रंक एंड ड्राइव का चालान काट दिया था। वह भरने के लिए गए तो पता लगा दस हजार रुपये की राशि भरनी होगी। लोक अदालत में उनका चालान 2,500 रुपये में भरा गया।
ब्रिचपुर निवासी अशोक ने बताया कि वह बाइक पर बिना हेलमेट के चल रहे थे। 20 सितंबर, 2024 को उनका एक हजार रुपये का चालान कटा था। अब लोक अदालत में उनका चालान 500 रुपये में निपट गया है।
लोक अदालत में फिर हुए एक
शनिवार की लोक अदालत में दो मामले ऐसे आए जिनमें 40 वर्ष से अधिक उम्र के दो दंपती ने तलाक के लिए केस डाला था। फर्स्ट मोशन यानि कानूनी तलाक की पहली प्रक्रिया के तहत लोक अदालत में पेश होने पर दोनों दंपतियों में आपसी सहमति बन गई। दोनों एकसाथ रहने के लिए तैयार हो गए।
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Karnal News: सालों से लंबित मुकदमों पर लगा विराम, लोक अदालत में 25,920 का समाधान



