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भारत में किसी को संपत्ति से बेदखल करने के लिए स्व-अर्जित संपत्ति में वसीयत या उपहार विलेख और पैतृक संपत्ति में कानूनी आधारों पर बेदखली प्रक्रिया अपनानी होती है। पहले कानूनी नोटिस भेजें, फिर सिविल न्यायालय में बेदखली का मुकदमा दायर करें। पैतृक संपत्ति से बच्चों को आसानी से बेदखल नहीं किया जा सकता।
बेदखली की प्रक्रिया
-संपत्ति का प्रकार जांचें : सूनिश्चित करें कि संपत्ति आपकी स्व-अर्जित (खरीदी हुई/वसीयत में मिली) है, न की पैतृक है।
-वसीयत निष्पादित करना : कोई व्यक्ति वसीयत निष्पादित का उपयोग करके किसी को अपनी स्वयं अर्जित संपत्ति से बाहर कर सकता है। यह निर्दिष्ट करेगा कि मृतक व्यक्ति की संपत्ति उनके निधन के बाद कैसे वितरित की जाएगी।
-अखबार में प्रकाशन : कोई व्यक्ति अपनी स्वयं अर्जित संपत्ति में किसी अन्य व्यक्ति की हिस्सेदारी को अस्वीकार करने के लिए अख़बार में विज्ञापन प्रकाशित कर सकता है। सार्वजनिक घोषणा से दुनिया को चेतावनी दी जाती है कि ऐसे व्यक्ति का अब मेरी संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं होगा। यह विज्ञापन विज्ञापनदाता के लक्ष्यों के एक विश्वसनीय संकेतक के रूप में कार्य करता है।
-कानूनी नोटिस : एक वकील के माध्यम से उस व्यक्ति (जैसे बेटा/बेटी) को संपत्ति खाली करने का औपचारिक कानूनी नोटिस भेजें।
-सिविल मुकदमा दायर करना : यदि नोटिस के बाद भी व्यक्ति घर खाली नहीं करता है तो आप संपत्ति के स्वामित्व के आधार पर अदालत में बेदखली का मुकदमा दायर कर सकते हैं।
-विशेष परिस्थिति (वरिष्ठ नागरिक): माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत, माता-पिता जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराकर बच्चे को घर से बेदखल करा सकते हैं।
-दीक्षा, सहायक जिला न्यायवादी, करनाल
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Karnal News: संपत्ति से बेदखल करने के लिए नोटिस के बाद सिविल न्यायालय में करना होगा केस




