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करनाल। अच्छा स्वास्थ्य सबसे बड़ा खजाना या वरदान है। इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती। पाॅलिथीन और सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग आपके स्वास्थ्य पर सीधे प्रभाव डालता है। मिट्टी में मिलकर इसके रसायन भूगर्भ जल को दूषित करते हैं। प्रतिबंधित सामान से निकले प्लास्टिक के सूक्ष्म कण खाने में मिलकर और सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर कैंसर सहित कई बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान के विकल्प से इसे खतरे से बचा जा सकता है। सिंगल यूज प्लास्टिक और इसके विकल्प की कीमत में अंतर मात्र कुछ पैसे का है।
सिंगल यूज प्लास्टिक का बना दोना 24 पैसे में मिलता है जबकि बाॅयोडिग्रेडेबल दोना 45 पैसे का। अन्य सामानों की कीमत में भी करीब इतना ही अंतर है। पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष एसडी अरोड़ा कहते हैं कि बाजार में बाॅयोडिग्रेडेबल (जैवनिम्ननीय) उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं। ये उत्पाद पर्यावरण के लिए मुफीद हैं। पानी और मिट्टी में घुलकर नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी या पानी को दूषित नहीं करते। वहीं प्लास्टिक को खत्म होने में करीब 400 साल लगते हैं। बाजार में पर्यावरण के मुफीद 150 से ज्यादा तरह के सामान हैं। इनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चम्मच, दोने, प्लेट, कटोरे, कप, गिलास और कई अन्य वस्तुएं शामिल हैं। थोक विक्रेताओं ने स्टॉक बदलना शुरू कर दिया है। हालांकि उनका कहना है कि ग्राहकों की ओर से इनकी मांग नहीं होगी तो सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना संभव नहीं होगा।
जागरूक नागरिक
10 साल से प्रयोग नहीं की पाॅलिथीन
गुड़ की मंडी के व्यापारी सन्नी दस साल से केवल बाॅयोडिग्रेडेबल उत्पाद ही बेचते हैं। निगम की ओर से उन्हें पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है। बोले कि जागरूकता आ रही है। आने वाले दिनों में बाॅयोडिग्रेडेबल उत्पादों की मांग और बढ़ेगी। अंबाला, पानीपत और करनाल में इनकी निर्माण इकाइयां लगने लगी हैं। इससे कीमतों में धीरे-धीरे स्थिरता आने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और प्रदेश पर्यावरण संरक्षण में नई मिसाल कायम करेगा।
सन्नी बताते हैं कि उनके पास कागज से लेकर मक्का, लकड़ी तक के उत्पाद हैं। उनकी कोशिश है कि ईयर बड जैसे सामान भी कागज या ऐसी ही पर्यावरण के मुफीद सामग्री के बने हों।
सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान
हानिकारक रसायन : प्लास्टिक में बीपीए और थैलेट्स जैसे जहरीले रसायन होते हैं, जो खाने में मिल सकते हैं।
हार्मोनल असंतुलन : ये रसायन अंतःस्रावी तंत्र में हस्तक्षेप करते हैं। प्रजनन संबंधी समस्याएं, हार्मोन असंतुलन हो सकता है।
कैंसर का खतरा : कुछ प्लास्टिक में मौजूद रसायन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
श्वसन संबंधी रोग : प्लास्टिक जलाने से निकलने वाले धुएं से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
माइक्रोप्लास्टिक : प्लास्टिक छोटे टुकड़ों में टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बन जाती है। खाने के सामान में प्रवेश कर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।
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Karnal News: मात्र कुछ पैसे अधिक है स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत

