Karnal News: बेसहारा पशुओं की भरमार, नगर निगम बेबस Latest Haryana News

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– निगम का दावा शहर में सिर्फ 500 बेसहारा पशु, गोशाला का विस्तारीकरण करने की है योजना

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माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। शायद ही कोई ऐसा वार्ड, कॉलोनी या सेक्टर हो, जहां बेसहारा पशु नजर न आते हों। जिनके कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। कई बार ये लोगों पर हमला भी कर देते हैं। वहीं कॉलोनियों में गंदगी फैला देते हैं।

इन बेसहारा पशुओं की संख्या हजारों में हो सकती लेकिन शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने की योजना बना रहे नगर निगम का दावा है कि शहर में इनकी संख्या 450 से 500 के बीच है। निगम की केवल एक नंदी गोशाला फूसगढ़ भरी पड़ी है, शहर की दो अन्य गोशालाओं में भी क्षमता से अधिक गोवंश हैं।

ऐसे में निगम फिलहाल गोशाला के विस्तारीकरण पर कार्य करने के साथ ही गोशाला को खाली करने के लिए पशुओं को ग्रामीण क्षेत्रों की गोशालाओं में भेज रहा है। इस कार्य की धीमी गति को देखकर लगता है कि समस्या का समाधान शीघ्र होने वाला नहीं है।

पिछले दिनों कष्ट निवारण समिति की बैठक में बेसहारा पशुओं का मुद्दा उठा तो प्रभारी मंत्री ने निगमायुक्त को शहर के बेसहारा पशुओं से मुक्त करने का आदेश दे दिया। इसके बाद निगम ने कार्ययोजना बनानी शुरू की। 1000 पशुओं की क्षमता वाली निगम की फूसगढ़ स्थित नंदी गोशाला में करीब 1200 गोवंश थे, जिसमें से पिछले दिनों 160 पशुओं को निसिंग की गोशाला भेज दिया गया।

इसी बीच 90 और पशुओं को शहर से पकड़कर नंदी गोशाला में लाया गया है, परिणाम ये है कि गोशाला में अभी भी क्षमता से अधिक पशु हैं। उप निगमायुक्त अशोक कुमार ने बताया कि असंध की गोशाला के प्रबंधक से भी बात की जाएगी, ताकि यहां से और पशुओं को वहां भेजा जा सके।

भले ही नगर निगम शहर को शीघ्र बेसहारा पशुओं से मुक्त करने का दावा कर रहा है लेकिन जिस धीमी गति से इस पर कार्य चल रहा है, उससे तो यही लगता है कि शहरवासियों को इस समस्या से शीघ्र निजात मिलने की संभावना नहीं है।

जिले में हैं 16 गोशालाएं

करनाल शहर में नंदी गोशाला फूसगढ़, श्रीकृष्ण गोशाला व श्रीराधा कृष्ण गोशाला आदि तीन गोशालाएं हैं। तीनों गोशालाओं की क्षमता 2000 पशुओं के रखने की ही है। जिलेभर में करीब 16 गोशालाएं हैं, जिसमें जुंडला, निसिंग, उपलाना, घरौंडा, बरसत, मुनक, कुंजपुरा, तरावड़ी, सीतामाई, गोंदर आदि की गोशालाएं शामिल हैं। जिनमें प्रत्येक की क्षमता 500 से 1200 पशुओं तक की है। श्रीराधा कृष्ण गोशाला सहित जिले कुछ गोशालाओं में तो पशुओं के रखरखाव की स्थिति काफी अच्छी है लेकिन अधिकतर में हरियाणा सरकार से आर्थिक सहायता मिलने के बावजूद पशुओं के रखरखाव की स्थिति अच्छी नहीं है।

पशुओं को बेसहारा छोड़ने पर भी लगे रोक

भले ही ये बेसहारा पशु आज किसानों से लेकर शहरियों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं लेकिन विचारणीय प्रश्न है कि इसके जनक भी कहीं न कहीं पशुपालक ही हैं। जो जब तक पशु दूध देता है, तब तक तो घर में रखते हैं, इसके बाद उसे बेसहारा छोड़ देते हैं। अब बैलों की आवश्यकता कृषि कार्यों में खत्म हो गई है, इसलिए नंदियों को तो दूध छुड़ाते ही सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। यही कारण है कि बेसहारा पशुओं में 85 प्रतिशत संख्या नंदियों की है। यदि इन पशुओं को बेसहारा छोड़ने पर रोक लगे, तभी इसका स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।

पशुओं की तस्करी बढ़ रही है। पिछले दिनों इसे लेकर पशु क्रूरता अधिनियम समिति की बैठक में तय किया गया है कि शीघ्र ही पशु तस्करी को रोकने के लिए पुलिस टीमों का भी गठन किया जाएगा। बेसहारा पशुओं का प्रबंधन करना तो नगर निगम की ही जिम्मेदारी है। यदि ईमानदारी से बेसहारा पशुओं की गिनती करके, उन्हें पकड़कर उनके रखरखाव की व्यवस्था कर दी जाए, तो समस्या खत्म हो जाएगी।

– विजय लिलारिया, पशु क्रूरता अधिनियम समिति (एसपीसीए) करनाल

नगर निगम की नंदी गोशाला में अभी जो पशु हैं, उनके रहने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं लेकिन इसके पास ही दो एकड़ जमीन है, जिस पर अनधिकृत कब्जा किया गया है। शीघ्र ही निगम इस भूमि को कब्जामुक्त करा यहां टीनशेड आदि की व्यवस्था करके गोशाला का विस्तारीकरण करेगा। जिससे यहां और अधिक पशुओं को रखा जा सकेगा। आसपास की ऐसी गोशाला संचालकों से बातचीत की जा रही है, जहां गोवंश की संख्या क्षमता से कम है। वहां भी करनाल से पशु भेजे जाएंगे। नगर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चल रहा है। शहर में करीब 450 से 500 बेसहारा पशु होने का अनुमान है। शीघ्र ही शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त किया जाएगा।

– अशोक कुमार, उप निगमायुक्त करनाल

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