करनाल। फ्लैट देने के नाम पर डेवलपर कंपनी ने निवेशकों से पैसे लिए। इसके बाद बैंक से भी ऋण उठा लिया। करीब दो सौ करोड़ रुपये लेने के छह साल बाद भी कंपनी निवेशकों को फ्लैट नहीं दे पाई। आरोप है कि पैसे वापस मांगने पर कंपनी ने खुद को दिवालिया तक घोषित कर दिया। पीड़ित लोगों ने रविवार को करनाल में कंपनी के कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन करने वालों में करनाल, अंबाला, पानीपत, कुरुक्षेत्र के से आए लोग भी शामिल रहे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने हरियाणा रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन में भी अपील लगाई लेकिन अब तक समाधान नहीं हो पाया। निवेशक अमित बजाज ने बताया कि इस कंपनी ने वर्ष 2018 में 283 फ्लैट देने का वादा किया था। यहां 107 वर्ग गज जमीन पर तीन मंजिला इमारत में फ्लैट बनाए जाने थे। इनकी कीमत 15 से 18 लाख रुपये रखी गई थी। लोगों ने इनमें निवेश करना शुरू कर दिया। सभी फ्लैट बिक गए लेकिन उनका फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। निवेशकों ने इस पर करीब 70 से 80 करोड़ कंपनी को जमा करवाए। बाद में पता चला कि कंपनी ने एक बैंक से करीब 96 करोड़ का लोन लिया है। जो ब्याज समेत अब करीब 150 करोड़ हो चुका है। बैंक के साथ लोगों को भी कंपनी ने चूना लगाया गया है।