Karnal News: केवल काउंटर पर प्रतिबंध, ग्राहक मांगे तो दुकानदार अंदर से लाकर देते हैं चीन का मांझा Latest Haryana News

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करनाल। प्रतिबंध के बावजूद शहर के बाजारों में चीन के मांझे की बिक्री जारी है। सदर बाजार, कलंदरी गेट और आसपास के क्षेत्रों में यह मांझा दुकानों के अंदर छिपाकर रखा जा रहा है। जब ग्राहक मांगता है तो दुकानदार अंदर से पॉलीथिन में पैक करके दे देते हैं। काउंटर पर प्रतिबंध के पालन का दावा किया जाता है। इधर पुलिस और नगर निगम की टीम आंखें मूंदे हुए हैं। बसंत पंचमी पर करोड़ों रुपये का कारोबार हो चुका है। चंद दुकानों के ही चालान किए गए हैं। बसंत पंचमी के बाद एक बार भी जांच नहीं हुई।

करनाल में लगातार चीन की डोर से होने वाले हादसों के बाद अमर उजाला की टीम ने कलंदरी गेट के पास स्थित एक पतंग की दुकान पर पहुंचकर चीन के मांझे की मांग की। पहले तो दुकानदार ने अनभिज्ञता जताई और सामान्य मांझा दिखाने की कोशिश की। दोबारा स्पष्ट रूप से चीन का मांझा मांगने पर वह कुछ क्षण हिचकिचाया। इसके बाद दुकान के अंदर गया और छिपाकर रखा मांझा निकाल लाया।

दुकानदार ने दो अलग-अलग किस्म के मांझे दिखाए। एक की कीमत 60 रुपये बताई, दूसरे की 100 रुपये। पूछने पर उसने बताया कि पहले इससे बेहतर क्वालिटी का माल भी था लेकिन बिक चुका है। उसके शब्द थे कि अब तो बस यही माल बचा है, अच्छा माल तो बसंत पंचमी तक निकल गया।


सदर बाजार में भी सक्रिय नेटवर्क

स्थानीय लोगों के अनुसार सादर बाजार सहित शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरीके से बिक्री की जा रही है। दुकानों के शेल्फ पर साधारण सूती मांझा रखा रहता है, जबकि चीन का मांझा अलग से पैक कर भीतर रखा जाता है। ग्राहक यदि विशेष रूप से पूछे तो ही उपलब्ध कराया जाता है। कुछ दुकानदार क्वालिटी के आधार पर 60, 80, 100 से लेकर 120 रुपये तक कीमत बताते हैं।


इसलिए लगाया है बैन

चीन का मांझा ज्यादातर प्रदेशों में बैन कर दिया गया है। वजह इससे हादसे होना है। ये मांझा इतना खतरनाक होता है कि इससे हर साल कई लोगों की जान चली जाती है और कई लोग घायल हो जाते हैं।


ऐसे बनाया जाता है झा

चीन के मांझे को कुछ लोग प्लास्टिक का मांझा भी कहते हैं। ये धागों से तैयार नहीं किया जाता। इसे नायलॉन और मैटेलिक पाउडर से बनाया जाता है। ये मांझा प्लास्टिक की तरह लगता है और स्ट्रेचेबल होता है। ऐसे में जब हम इस मांझे को खींचते हैं तो ये टूटने की बजाय और बड़ा हो जाता है। इस मांझे को काटना भी काफी मुश्किल होता है। इस मांझे पर कांच या लोहे के चूरे से धार भी लगाई जाती है, जिस वजह से ये मांझा और भी घातक हो जाता है।


वर्जन

पिछले दिनों छापे के दौरान कई जगह प्लास्टिक और चीन के मांझे को जब्त किया था। दुकानदार के खिलाफ चालान की कार्रववाई की गई थी। आगे आने वाले समय में भी इसको दिखवाया जाएगा। यदि कोई बेचता मिला तो कार्रवाई की जाएगी। – प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी, शहर


होमगार्ड का चीरा चेहरा, बुजुर्ग महिला के पैर की नस कटी

– चीन के मांझे से 24 जनवरी को बाइक होमगार्ड अमित शर्मा का चेहरा चीरा जा चुका है। अमित की आंख के ऊपर आठ टांके आए थे। वह बाइक पर जा रहे थे। हेलमेट पहने होने से बड़ा हादसा बच गया था। उसी दिन शाम को रामनगर में घर के बाहर सैर कर रही बुजुर्ग महिला संतोष की टांग की नस कट गई। दोनों को अस्पताल में दाखिल करवाया गया। होमगार्ड को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। बुजुर्ग महिला का इलाज निजी अस्पताल में चलता रहा। बाजार में खरीदारी करने पहुंचे बुजुर्ग का पैर तक काट चुका है। चीन के मांझे से बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हो चुकी है।

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Karnal News: केवल काउंटर पर प्रतिबंध, ग्राहक मांगे तो दुकानदार अंदर से लाकर देते हैं चीन का मांझा