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शहरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, अचानक भौंकने की घटनाएं और बचपन में पालतू या आवारा कुत्ते के हमले या डराने के अनुभव से लोग साइनोफोबिया से पीड़ित हो जाते हैं। इस फोबिया में कुत्तों से अत्यधिक डर लगता है। जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में हर दिन लगभग 250 मरीज आते हैं। चिंता और घबराहट से जुड़े मामलों में बातचीत में इस फोबिया के मामले अधिक आ रहे हैं। बचपन में हुए नकारात्मक अनुभव, परिवार में किसी के कुत्तों से डरने की प्रवृत्ति, मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर कुत्तों के हमलों की ज्यादा चर्चा या सड़कों पर लावारिस कुत्तो की बढ़ती संख्या से फोबिया अधिक बढ़ रहा है। साथ ही जिन लोगों ने बचपन में कुत्तों का पीछा करने, काटने या अचानक हमला जैसी कोई घटना देखी हो, उनमें यह भय गहराई तक बैठ जाता है।
लक्षण
कुत्ता दिखते ही दिल की धड़कन तेज होना। सांस फूलना और पैर कांपना। पसीना आना और जगह छोड़कर भागने की इच्छा। सड़क पर चलते समय लगातार पीछे देखने की प्रवृत्ति।अचानक भौंकने की आवाज पर घबराहट।
बचाव
कुत्तों को धीरे-धीरे सुरक्षित दूरी से देखने की आदत डालें। ऐस वीडियो न देखें जो कुत्तों के हमलों को दिखाते हों। गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं। जरूरत पड़ने पर पेशेवर काउंसिलिंग लें।
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Karnal News: कुत्तों के पास जाने से होती है घबराहट तो साइनोफोबिया से हैं पीड़ित

