Karnal News: स्कूलों में कक्षा तीसरी से अनिवार्य की जाए पंजाबी


– पंजाबी भाषा अध्यापक विकास समिति ने उठाई मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर

करनाल। हिंदी और अंग्रेजी की तर्ज पर निजी व सरकारी स्कूलों में कक्षा तीसरी से पंजाबी विषय को पढ़ाया जाना अनिवार्य हो। हरियाणा में पंजाबी भाषा को दूसरी भाषा का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में यह संवैधानिक तौर पर लागू होना चाहिए। इसे लेकर पंजाबी भाषा अध्यापक विकास समिति हरियाणा ने मांग उठाई है।

इस संदर्भ में समिति की ओर से मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। प्रधान इंद्रजीत सिंह भाटी व डॉ. करनैल चंद ने मांगपत्र हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक के वरिष्ठ नेता अमरेन्द्र सिंह अरोड़ा को सौंपा। उन्होंने कहा कि पंजाबी साहित्य अकादमी सृजित की जानी चाहिए। इसके बाद खंड व जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन हो। सिख नेता महेंद्र सिंह अरोड़ा ने सभी पंजाबी भाषा अध्यापकों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगें जायज हैं, इन्हें मुख्यमंत्री से मिलकर शीघ्र ही पूरा करवाने का प्रयास करेंगे। इस अवसर पर डॉ. कुलविंद्र सिंह, डॉ. बलविंद्र सिंह, बुटा सिंह, अवतार सिंह, कुलदीप सिंह, गुरदेव सिंह और लबाना सिक्ख बिरादरी के प्रधान जरनैल सिंह मौजूद रहे।

ताकि विद्यार्थी चुन सकें मनपसंद भाषा

हरियाणा शिक्षा बोर्ड व सीबीएसई विद्यालयों में कक्षा छठी से दसवीं तक त्रिभाषा सूत्र की अधिसूचना जल्द ही जारी करके लागू हो, ताकि पंजाबी, संस्कृत एवं उर्दू भाषा पढ़ने के इच्छुक विद्याथी तीसरी भाषा के रूप में हिंदी, अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ अपनी मनपसंद तीसरी भाषा को पढ़ सकें व इसको सीबीएसई की तर्ज पर अलग विषयों के रूप में पढ़ाया जाए। जिस तरह संस्कृत की ओटी को बीएड के समान मान्यता दी गई है उसी प्रकार पंजाबी भाषा ओटी को बीएड के समान मान्यता दी जाए।

यह हैं मुख्य मांगें

– हरियाणा में पंजाबी भाषा को दूसरी भाषा का दर्जा प्राप्त है। संवैधानिक तौर पर सभी निजी व सरकारी स्कूलों में पंजाबी भाषा को तीसरी कक्षा से पढ़ाया जाए।

– पंजाबी अध्यापकों की वरिष्ठता सूची तैयार कर पदोन्नत करके स्टेशन आवंटित किए जाएं जो कि काफी लंबे समय से लंबित हैं।

– स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान पंजाबी अध्यापक एवं प्रवक्ता के सभी रिक्त पद खोले जाएं और सभी विद्यालयों में पंजाबी अध्यापक पद व प्रवक्ता का रिक्त पद सृजित किया जाए एवं रिक्त पदों को जल्द भरा जाए।

– पंजाबी साहित्य अकादमी को बहाल करके इसे पुन: सृजित किया जाए। दूसरे विषयों की तरह पंजाबी की प्रतियोगिताएं पंजाबी साहित्य अकादमी हरियाणा के सहयोग से खंड, जिला व राज्य स्तर पर आयोजित की जाएं।

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