जींद। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। ऐसे में हाइड्रोजन गैस बनाने को लेकर अड़चन आ गई है। हाइड्रोजन गैस बनाने के लिए उपयोग में लाए जा रहे पानी की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही है।
सबमर्सिबल से मिलने वाले पानी का टीडीएस निर्धारित मानक से अधिक पाया गया है जिसके चलते गैस उत्पादन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। हाइड्रोजन प्लांट में इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया के जरिए पानी से हाइड्रोजन गैस बनाई जानी है। इस प्रक्रिया के लिए शुद्ध पानी की आवश्यकता होती है ताकि गैस की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सबमर्सिबल से निकल रहे पानी में घुलनशील ठोस पदार्थों की मात्रा अधिक है जो हाइड्रोजन गैस उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए रेलवे और प्लांट प्रबंधन की ओर से पानी का नमूना जांच के लिए लैब में भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि पानी को किस स्तर तक ट्रीटमेंट की जरूरत है या फिर किसी वैकल्पिक जल स्रोत का उपयोग करना पड़ेगा।