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जींद। हिंदू कन्या महाविद्यालय में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन सुनने को मिला। कथा वाचक गौरदास महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को जीवन का आदर्श बताते हुए कहा कि सच्चा संबंध धन-दौलत नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास पर आधारित होता है।उन्होंने बताया कि सुदामा जी भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र और महान विद्वान ब्राह्मण थे, लेकिन जीवन में अत्यंत गरीबी का सामना कर रहे थे। हालात इतने कठिन थे कि परिवार का पालन-पोषण करना भी मुश्किल हो गया था। एक दिन पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका जाने को तैयार हुए। महाराज ने भावपूर्ण शैली में बताया कि सुदामा की पत्नी ने बड़ी कठिनाई से पड़ोस से चावल उधार लेकर एक छोटी सी पोटली तैयार की, जिसे सुदामा ने कृष्ण के लिए उपहार के रूप में साथ लिया। द्वारका पहुंचने पर सुदामा वहां के वैभव को देखकर चकित रह गए, लेकिन जब श्रीकृष्ण को उनके आने का पता चला तो वे स्वयं नंगे पांव दौड़कर अपने मित्र का स्वागत करने पहुंचे।
कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि सच्ची भक्ति और निष्कपट मित्रता में कोई भेदभाव नहीं होता। भगवान अपने भक्त के प्रेम के आगे सभी औपचारिकताएं भूल जाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा का श्रवण किया।
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