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हिसार। सर्दियों में हड्डियों के जोड़ों का दर्द बढ़ने से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राहत दिलाने के लिए जिला नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में शनिवार को विशेष शिविर लगाया गया, जिसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति व पंचकर्म के जरिए आए 97 मरीजों को लाभ पहुंचाया गया।
शिविर का शुभारंभ आयुष प्रभारी डॉ. सुखवीर वर्मा ने मरीजों की काउंसिलिंग के साथ किया। उन्होंने बताया कि चोट (मोच, फ्रैक्चर), गठिया (ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस), संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग (ल्यूपस), गाउट और टेंडिनाइटिस जैसी स्थितियों के कारण जोड़ों में दर्द होता है। अधिक वजन, खराब जीवनशैली और विटामिन डी की कमी भी दर्द को बढ़ाती है। ऐसे मामलों में आयुर्वेद दीर्घकालिक और प्रभावी राहत देता है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि गठिया बाय के मरीजों को दर्द से पूरी तरह राहत मिलने में एक वर्ष तक लग सकता है, इसलिए धैर्य जरूरी है। वह रोजाना 50 से अधिक मरीजों को ओपीडी में देखते हैं, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत मरीज घुटने, गर्दन और कंधों के दर्द से पीड़ित रहते हैं। इसी वजह से विशेष शिविर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
योग सहायक कविता और पूनम ने मरीजों को योगाभ्यास करवाया। पंचकर्म के तहत सिकाई की गई, जबकि मर्म चिकित्सा में शरीर के ऊर्जा बिंदुओं को उत्तेजित कर दर्द में राहत दी गई। जरूरतमंद मरीजों को दवाइयां और तेल भी उपलब्ध कराए गए। फार्मेसिस्ट रविंद्र जांगड़ा, ज्योति और टीनू ने शिविर में सहयोग दिया।
महंगी नहीं सबसे सस्ती पद्धति है आयुर्वेद : डॉ. वर्मा
आयुष प्रभारी डॉ. सुखवीर वर्मा ने बताया कि आम धारणा है कि आयुर्वेद महंगी चिकित्सा पद्धति है, जबकि यह वास्तविकता नहीं है। केवल कुछ उत्पाद जैसे स्वर्ण भस्म की कीमत अधिक होती है। स्वर्ण भस्म कई हृदय रोगों में फायदेमंद है और दिल व उसकी मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती है।
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Hisar News: सर्दियों की मार पर पंचकर्म का वार…जोड़ों का दर्द, पंचकर्म और आयुर्वेद से 97 मरीजों को मिली राहत



