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गांव धांगड़ के स्वतंत्रता सेनानी
– फोटो : संवाद
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कभी हिसार जिले का ही हिस्सा रहे फतेहाबाद का आजादी के आंदोलन में अहम योगदान रहा है। जिला मुख्यालय के साथ लगते गांव धांगड़ से ही 14 स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की ऐसी जंग लड़ी कि सदा के लिए अमर हो गए। इन 14 सेनानियों ने पहले वर्ष 1931-32 के सिविल नारमानी और नमक सत्याग्रह तथा बाद में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया। स्वतंत्रता के इन प्रहरियों ने देश की आजादी के लिए जेल भी काटी। उनका संघर्ष व त्याग नई पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहे, इसलिए उन सभी के नाम गांव धांगड़ के गौरव पट्ट पर अंकित करवाए गए हैं।
गांव धांगड़ के बुजुर्ग छबीलदास बताते हैं कि इन 14 शूरवीरों के संघर्ष की कहानियां आज भी जब सुनते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन आंदोलनकारियों ने अलग-अलग समय पर जेल काटी। इसके बावजूद संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा। गांव के स्वतंत्रता सेनानियों में गणपत काजला, ताराचंद सेठी, बगड़ावत, नत्थूराम तरड़, हरीराम भादू, धनाराम, रणजीत, हरलाल, सहीराम, पोकर राम, प्रेम नारायण, बीरबल भादू, शिवलाल व रामरतन पूनियां शामिल रहे। इनमें से नत्थूराम तरड़, गणपत काजला व बगड़ावत मुल्तान जेल में रहे जबकि बाकी अन्य लाहौर जेल में कैद रहे थे। सजा पूरी करने के बाद भी इनका संघर्ष जारी रहा।
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Haryana: फतेहाबाद के गांव धांगड़ के 14 स्वतंत्रता सेनानियों की अमर गाथा, तीन मुल्तान व 11 लाहौर जेल में रहे



