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नगर परिषद की लापरवाही से बढ़ा प्रदूषण, पिछले कई दिनों से लगातार आग और धुएं का सिलसिला जारी
दिनेश देशवाल
नूंह। एक तरफ हरियाणा सरकार और प्रशासन लोगों को स्वच्छ हवा देने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, दूसरी ओर जिला मुख्यालय नूंह में ही नगर परिषद खुलेआम प्रदूषण फैलाने में लगी हुई है। शहर की नलहड़ रोड स्थित डंपिंग यार्ड में पिछले कई दिनों से लगातार आग और धुएं का सिलसिला जारी है। हर वक्त वहां से उठता जहरीला धुआं अब शहरवासियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है, मगर नगर परिषद, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग पूरी तरह मौन दिखाई दे रहे हैं।
शुक्रवार देर रात इस डंपिंग यार्ड में भीषण आग लग गई। आसमान में उठते काले धुएं के गुबार ने पूरे नूंह शहर को ढक लिया। देर रात शहर के कई इलाकों में सांस लेना तक मुश्किल हो गया। सूचना मिलने पर नगर परिषद और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलवाई गईं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन जलते कूड़े से उठता धुआं रातभर लोगों को परेशान करता रहा। शनिवार को भी कूड़े के ढेरों में जगह-जगह आग सुलगती रही और हवा में तैरता जहरीला धुआं तकलीफ का कारण बन गया।
स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी लगातार इस स्थिति को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि नगर परिषद की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता ने नूंह को प्रदूषण के दलदल में धकेल दिया है।
इस पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही डंपिंग यार्ड को स्थानांतरित करने की कोई योजना बनी।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
पर्यावरण प्रेमी बलजीत का कहना है कि पिछले कई महीनों से यह डंपिंग यार्ड प्रदूषण का बड़ा केंद्र बना हुआ है। रोजाना सैकड़ों टन कचरा यहां खुले में फेंका जाता है। इसमें घरेलू कचरे के साथ-साथ प्लास्टिक, पॉलीथिन और मेडिकल वेस्ट तक शामिल होता है, जिसे बिना किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के सीधे जला दिया जाता है। इससे उठने वाला धुआं पूरे इलाके के लोगों की सेहत के लिए खतरा बन गया है।
-स्थानीय नागरिक नोमान खान का कहना है कि प्रशासन किसानों द्वारा पराली जलाने पर तो भारी जुर्माने और मुकदमे दर्ज करता है, लेकिन नगर परिषद के इस खुले प्रदूषण पर आंख मूंदे बैठा है। “जब कोई किसान कुछ एकड़ खेत में पराली जलाता है तो उसे पर्यावरण का दुश्मन बताया जाता है, लेकिन नगर परिषद तो रोजाना पूरे शहर के कूड़े को जला रही है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती,”।
-स्थानीय नागरिक गणेश कुमार बताते हैं कि यह डंपिंग यार्ड अब सिर्फ आसपास के गांवों के लिए नहीं बल्कि पूरे शहर के लिए स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यहां से उठने वाला धुआं स्कूलों, अस्पतालों और कॉलोनियों तक पहुंचता है। कई बच्चों और बुजुर्गों को खांसी, दमा और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें होने लगी हैं। हर सुबह जब हवा में बदबू और धुंध मिलती है तो लगता है जैसे शहर किसी गैस चैंबर में तब्दील हो गया हो।
-स्थानीय नागरिक रवींद्र गर्ग का कहना है कि यदि प्रशासन किसानों की तरह नगर परिषद पर भी सख्ती दिखाए, तो यह समस्या खत्म हो सकती है। कूड़े को खुले में जलाने के बजाय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के तहत इसका वैज्ञानिक निपटान किया जाए लेकिन नगर परिषद की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता ने इसे प्रदूषण का पर्याय बना दिया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर परिषद के डीएमसी दलबीर सिंह ने कहा कि रात में लगी आग को बुझा दिया गया था। वहां कुछ लोगों की ड्यूटी लगाकर धुआं और आग की समस्या पर नियंत्रण पाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही इसकी प्रक्रिया शुरू कराकर वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया लागू की जाएगी।
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Gurugram News: नूंह में डंपिंग यार्ड से उठता जहरीला धुआं बना सांसों के लिए संकट



