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आईसीआईसीआई बैंक ने ग्राहक को बिना सूचना के रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए थे
विराट त्यागी
गुरुग्राम। आईसीआईसीआई बैंक और खाताधारक के बीच तय सेवा शर्ताें के अनुसार रुपये ट्रांसफर करने में बरती गई लापरवाही को जिला उपभोक्ता आयोग ने दोषी माना है। खाता धारक के खाते से सिर्फ एक ही खाते में रुपये भेजने की शर्त होने के बावजूद बैंक ने अन्य खाते में 39.90 लाख रुपये भेजे थे। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने बैंक 19.95 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से वापस करने का आदेश दिया है। हालांकि इस मामले में आरबीआई 39.90 की आधी राशि पहले ही खाता धारक को वापस दिलवा चुका है।
राज गैस सर्विस के मालिक अरुण सचदेवा ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि आईसीआईसीआई की सेक्टर-14 ब्रांच में खाता था। अपने खाते पर उन्होंने ओडी (ओवर ड्राफ्ट) की सुविधा ली हुई थी। उन्होंने आयोग में बताया कि बैंक से उनका करार था कि खाते से सिर्फ एलपीजी एसबीयू डोमेस्टिक खाते में ही रुपये भेजे जाएंगे। इसके अलावा दूसरे किसी भी बैंक खाते में रुपये नहीं भेजे जा सकते। अगर वह खुद भी अपने खाते से नकद निकलवाना चाहते हैं तो वो भी नहीं निकाल सकते थे। चार नवंबर 2023 को उनके नंबर बैंक खाते से लिंक हो गया । पांच नवंबर को उन्होंने अपनी ओडी लिमिट की जांच की तो पता चला कि खाते से 39.90 लाख रुपये किसी को दिए गए है।इन्होंने इसकी शिकायत आरबीआई, बैंक और पुलिस को भी की।
19 जनवरी 2024 को आरबीआई की एक टीम ने मामले की जांच की। जांच के बाद आईसीआईसीआई बैंक को निर्देश दिया गया कि वह 19.90 लाख रुपये बैंक खाता धारक को वापस दी जाए। इस मामले में बैंक की तरफ से आयोग में कोई भी पक्ष नहीं रखा गया। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह खाता धारक की बची हुई 19.95 लाख रुपये की राशि को नौ प्रतिशत की दर से वापस करें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर 50 हजार रुपये भी दिए जाएं।
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Gurugram News: एक खाते में ही भेजे जा सकते थे रुपये, दूसरे खाते में ट्रांसफर पर बैंक लौटाएगा 19.95 लाख



