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फतेहाबाद। जिले में सेम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। करीब 40 हजार एकड़ कृषि भूमि सेम की चपेट में है। इनमें से लगभग 28 हजार एकड़ भूमि को बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास शुरू किए गए हैं, लेकिन 12 हजार एकड़ भूमि अब भी समाधान से वंचित है। इससे प्रभावित गांवों के किसान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। किसानों ने प्रदेश सरकार से आगामी बजट में सेम की स्थायी रोकथाम के लिए विशेष प्रावधान करने की मांग की है।
जिले के 36 गांवों में लगभग 50 हजार एकड़ भूमि सेमग्रस्त हो चुकी है। इसके अलावा 10 अन्य गांवों में भूजल स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे करीब 9,500 एकड़ भूमि और प्रभावित होने की कगार पर है। प्रभावित गांवों में मेहूवाला, खाराखेड़ी, काजलहेड़ी, कुम्हारिया, गोरखपुर, बैजलपुर, भोड़ा होशनाक, बनावाली, किरढ़ान और ढांड शामिल हैं।
किसानों ने मांग की है कि सेमग्रस्त क्षेत्रों में सोलर पंप प्रोजेक्ट स्थापित किए जाएं और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करते हुए पाइपलाइन बिछाई जाए, ताकि अतिरिक्त पानी की निकासी हो सके और जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाया जा सके।
ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
प्रभावित किसानों का कहना है कि कई वर्षों से इन खेतों में कोई पैदावार नहीं हो रही। जलभराव के कारण मिट्टी की उर्वरता भी लगातार घट रही है। यदि समय रहते सोलर पंप और ड्रेनेज सिस्टम लागू नहीं किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं तथा भूमि पूरी तरह बंजर होने का खतरा है।
सेमग्रस्त भूमि और पंप की आवश्यकता
गांव सेमग्रस्त भूमि (एकड़) पंप
मेहूवाला 400
05
खाराखेड़ी 2000
20
काजलहेड़ी 1430
15
कुम्हारिया
1200
20
गोरखपुर
1500
15
बैजलपुर
500
05
भोड़ा होशनाक 200
03
बनावाली 1000
10
किरढ़ान 700
07
ढांड
700
07
किसानों की प्रतिक्रिया
सेम की समस्या के कारण खेत में पिछले कई वर्षों से पैदावार नहीं हो रही है। प्रदेश सरकार को बजट में सेम के स्थायी समाधान करने के लिए पाइपलाइन डालने के लिए बजट जारी करना चाहिए, ताकि भूमि को फिर से उपजाऊ बनाया जा सके। – राम सिंह कड़वासरा किसान।
सेम की समस्या होने से जमीन खराब हो चुकी है। सेमग्रस्त भूमि को ठीक करने के लिए प्रशासन से कई बार मांग की गई है, लेकिन समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में इस बार जारी होने वाले बजट में उम्मीद है सम की समस्या के लिए राशि मंजूर होगी। – लीलूराम, किसान।
सेम के कारण कृषि योग्य भूमि खराब हो चुकी है। बिना बारिश के ही जमीन दलदल बन। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो रही है। सरकार से अपील है कि बजट में सेम की समस्या के लिए राशि जारी करने का जिक्र किया जाए। – रायसिंह सहारण किसान।
कृषि योग्य भूमि बेकार होने के कारण उनको खेती छोड़नी पड़ रही है। पिछले 15 वर्षों से सेम की रकबा लगातार बढ़ रहा है। इस समस्या का समाधान प्रदेश सरकार अपने बजट में राशि मंजूर करके कर सकती है। – इंद्रराज, किसान।
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