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हरियाणा में निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने बड़ी सियासी परीक्षा खड़ी हो गई है। तीन नगर निगम, तीन नगर पालिका और एक नगर परिषद के चुनाव पार्टी के लिए सिर्फ सीटें जीतने का अवसर नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता, नेतृत्व की क्षमता और जनता का भरोसा फिर से हासिल करने की कसौटी भी हैं।
राव नरेंद्र सिंह के लिए प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद यह पहला बड़ा स्थानीय चुनाव होगा। ऐसे में पार्टी की रणनीति, टिकट वितरण और चुनावी समन्वय उनकी नेतृत्व क्षमता की सीधी परीक्षा माने जा रहे हैं।
कांग्रेस का दावा है कि संगठन विस्तार, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और नेता प्रतिपक्ष मिलने के बाद पार्टी पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। हालांकि, हालिया राज्यसभा चुनाव में पांच विधायकों पर लगे क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।
इससे हाईकमान से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक तालमेल बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती साबित करने का अहम मौका होंगे।
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