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चरखी दादरी। जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल होने के बाद जहां एक ओर विकास की उम्मीदें जगी थीं, वहीं दूसरी ओर दादरी जिले के व्यापारियों और उद्योग संचालकों को नई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों पहले दादरी शहर में सीसीआई फैक्ट्री थी, जो बंद पड़ी है। न तो वहां नया उद्योग लगा है और न कहीं कोई फैक्ट्री या किसी प्रकार का उत्पादन शुरू हुआ है।
एनसीआर में नियमों और पाबंदियों का दायरा बढ़ा है लेकिन मूलभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होने से स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा है। एनसीआर के नियमों के तहत जनरेटर सेट के उपयोग पर सख्त पाबंदी लागू है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिले में अभी तक 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है। ऐसे में उद्योग संचालकों और व्यापारियों के सामने उत्पादन और कामकाज को सुचारु रूप से चलाना चुनौती बन गया है।
इसके अलावा एनसीआर में जिला शामिल होने के बाद किसी प्रकार का नया उद्योग स्थापित नहीं हुआ। न ही कोई योजना बनाई गई। लिहाजा व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए एनसीआर की शर्तें जी का जंजाल बन गए हैं।
औद्योगिक क्षेत्र की कमी
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि एनसीआर में शामिल होने के बाद नियम तो महानगरों जैसे लागू कर दिए गए लेकिन सुविधाएं उसी स्तर की नहीं दी गईं। इससे प्रतिस्पर्धा में टिके रहना मुश्किल हो रहा है। खासकर वे उद्योग जो लगातार बिजली पर निर्भर हैं, उनकी लागत बढ़ रही है और उत्पादन घट रहा है। दूसरी बड़ी समस्या जिले में औद्योगिक क्षेत्र की कमी है। दादरी में आज भी बड़े स्तर पर कोई विकसित औद्योगिक हब नहीं बन पाया है।
क्रशर जोन और खेत पर आश्रित जिला
दादरी की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से क्रशर जोन और कृषि पर आधारित है। एनसीआर की पाबंदियों के चलते क्रशर उद्योग भी समय-समय पर बंद रहता है जिससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है। कृषि पर निर्भरता भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है क्योंकि मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितता किसानों और उससे जुड़े व्यापारियों के लिए चुनौती बनी रहती है। ऐसे में उद्योगों के अभाव में रोजगार के सीमित अवसर ही उपलब्ध हैं जिससे युवाओं को बाहर पलायन करना पड़ रहा है।
एनसीआर में जिसा शामिल होने के बाद उद्योग में काफी दिक्कतें बढ़ गई हैं। गाड़ियां 10 साल में मियाद पूरी कर लेते हैं तथा एनसीआर में डीजल जनरेटर बैन है। इस कारण उन्हें हाइब्रिड जनरेटर्स लगाने पड़ रहे हैं। ग्रैप के नियम लागू होते ही मशीनों को बंद करवा दिया जाता है तथा अगर कोई इस्तेमाल भी करता है तो प्रशासन की ओर से नोटिस थमा दिया जाता है।
– राकेश अरोड़ा, प्रधान, रोहतक रोड मैन्युफैक्चरर्स एसोशिएशन
दादरी जिले को एनसीआर में शमिल होने के बाद से अनेक समस्या झेलनी पड़ रही हैं। दिल्ली का प्रदूषण बढ़ते ही दादरी के उद्योगाें पर भी ताला लग जाता है। ऐसी फैक्ट्रियां जिनसे धुंआ निकलता है वह ठप हो जाती है। ऐसे में उद्योगपतियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं वाहनों की मियाद भी घटा दी गई है।
-रविंद्र गुप्ता, संरक्षक, दादरी नगर व्यापार मंडल
दादरी जिला बनने के साथ ही एनसीआर में शामिल हो गया लेकिन यहां शहर में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। सड़कें टूटी पड़ी हैं, पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ा है। दिल्ली के आस पास के जिलों में तो एनसीआर जिलों को लाभ मिला लेकिन दादरी पूरी तरह से पिछड़ा हुआ है।
-बलराम गुप्ता, जिला प्रधान, हरियाणा व्यापार मंडल
एनसीआर के चलते गाड़ियों को महज 15 व 10 साल के लिए सीमित कर दिया गया है, इससे सबसे बड़ा नुकसान हो रहा है। न दादरी में कोई उद्योग लगा है और न ही आगे की कोई प्लानिंग है। यहां पर सिर्फ नियम थोप दिए गए हैं, जो केवल नुकसान ही कर रहे हैं। इसका फायदा जरा सा भी नहीं है। न कोई ग्रांट आई है। इसको जल्द से जल्द हटवाना चाहिए।
-संदीप फोगाट, प्रधान, मोबाइल एसोसिएशन दादरी
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Charkhi Dadri News: एनसीआर में शामिल होने के बाद उद्योगों पर पड़ी नियमाें की मार, नया उद्योग नहीं हो पाया स्थापित




