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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मेरिट के आधार पर एमडी (साइकेट्री) में सीट हासिल कर फीस जमा कराने के बाद भी तकनीकी चूक का हवाला देकर प्रवेश रोकना गलत है। हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी नव्या सिंह को राहत देते हुए निर्देश दिया कि इस्तीफे से खाली हुई स्टेट कोटा सीट को स्ट्रे राउंड में शामिल न किया जाए और उसे उसी सीट पर समायोजित किया जाए।
खंडपीठ ने कहा कि अभ्यर्थी ने पूरी सावधानी बरती, मेरिट के आधार पर सीट पाई और फीस जमा की। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि उसकी कोई गलती नहीं थी। ऐसे में प्रशासनिक/प्रक्रियात्मक त्रुटि का खामियाजा उस पर नहीं डाला जा सकता। अभ्यर्थी को जीएमसीएच-32 में एमडी (साइकेट्री) सीट काउंसिलिंग के जरिये आवंटित हुई थी। विवाद तब पैदा हुआ जब पहले राउंड की एक अभ्यर्थी ने जॉइन तो कर लिया लेकिन उसकी रिपोर्टिंग ऑनलाइन अपडेट नहीं हुई। सिस्टम में सीट खाली दिखी और अगले राउंड में नव्या सिंह को आवंटित हो गई।
बाद में विसंगति सामने आने पर कॉलेज ने इसे अनजाने में हुई प्रशासनिक गलती बताकर प्रवेश जारी रखने से मना कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की पात्रता और मेरिट पर कोई सवाल नहीं है। उसे विधिवत सीट ऑफर हुई और उसने फीस जमा कर दी। अगर उसे पाठ्यक्रम जारी रखने से रोका गया तो उसे अपूर्णीय क्षति होगी क्योंकि आगे की काउंसिलिंग में वह अयोग्य हो जाएगी। सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस बीच स्टेट कोटा की एक सीट इस्तीफे से खाली हुई है जिसे स्ट्रे राउंड में डालने का प्रस्ताव है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि स्ट्रे राउंड में चयनित होने वाला अभ्यर्थी मेरिट में याचिकाकर्ता से नीचे हो सकता है।
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Chandigarh News: मेरिट पर मिली सीट तकनीकी गलती बताकर रोकी, हाईकोर्ट से राहत


