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चंडीगढ़। पीजीआई ने मंगलवार को गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) पर 11वीं अंतरराष्ट्रीय सीएमई का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत पीजीआई से सुखना लेक तक आयोजित वॉकथॉन से हुई जिसमें डॉक्टरों, छात्रों और आम लोगों ने भाग लिया। हैरानी की बात यह रही इनके हाथ में न तो कोई बैनर था और न ही कोई पोस्टर। बहुत से लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि आखिर वॉकथॉन का उद्देश्य क्या है। ऐसे में दिल की बीमारियों से बचाव का संदेश कैसे दिया होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं कुछ लोग साइकिल ट्रैक पर चल रहे थे। इस कारण साइकल सवारों को सड़क पर उतरकर जाना पड़ा।
इसके बाद वर्ल्ड एनसीडी फेडरेशन और नाइन के सहयोग से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से निपटना: जनस्वास्थ्य का दृष्टिकोण विषय पर सीएमई आयोजित हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. आरके राठो, प्रो. राजेश विजयवर्गीय, डॉ. राकेश शर्मा और प्रो. जेएस ठाकुर मौजूद रहे। पहले सत्र में राजेश विजयवर्गीय ने भारत में दिल की बीमारियों के बढ़ते मामलों पर जानकारी दी। मनफूल सिंह ने नई तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका बताई, जबकि कविता नारंग ने स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सों की भूमिका पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में पंकज मल्होत्रा, श्रीनिवास रेड्डी, पूजा सिक्का और संजीव असोत्रा ने दिल के लिए नए जोखिम कारकों, महिलाओं में दिल की बीमारियों और रूमेटिक हार्ट डिजीज जैसे मुद्दों पर चर्चा की। तीसरे सत्र में संदीप ग्रोवर, चिन्मय और अजय बहल ने दिल की बीमारियों के नए कारण, इलाज और रिहैबिलिटेशन पर जानकारी दी।
चौथे सत्र में प्रो. जेएस ठाकुर की अध्यक्षता में पैनल चर्चा हुई, जिसमें डॉ. चिन्मय, डॉ. ओपी सैनी, डॉ. पंकज अरोड़ा, डॉ. एके सूद और डॉ. अवुला लक्ष्मी ने भाग लिया। कार्यक्रम में पोस्टर प्रेजेंटेशन और पब्लिक फोरम भी हुआ जिसमें लोगों ने सवाल पूछे। अंत में विशेषज्ञों ने कहा कि दिल की बीमारियों से बचने के लिए जागरूकता, सही खानपान, व्यायाम और समय पर जांच बेहद जरूरी है।
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Chandigarh News: पीजीआई ने बिना बैनर-पोस्टर ही वॉकथॉन कर दे दिया हार्ट डिसीज से बचाव का संदेश


