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चंडीगढ़। सेना द्वारा रूस से आयातित टैंक और अन्य रक्षा उपकरणों के पार्ट अब पंजाब में भी बनाने की शुरुआत की जा सकती है। यह आवश्यकता रूस और यूक्रेन वार के बाद से पड़ने लगी है। सैन्य उपकरणों के कई ऐसे पार्ट हैं जिनको रूस या तो बना नहीं रहा या उनकी सप्लाई में काफी ज्यादा समय लगता है। सेना का कहना है कि यदि इमरजेंसी में किसी पार्ट की आवश्यकता पड़े तो स्वदेशी इंडस्ट्री में उसको तैयार किया जा सकता है।
सीआईआई में आयोजित अचीविंग एक्सीलेंस इन मैन्युफैक्चरिंग में पहुंचे वेस्टर्न कमांड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया ने कहा कि पंजाब की इंडस्ट्री यह कर सकती है। हां, कुछ उद्यमियों को जुगाड़ वाली सोच से ऊपर उठकर इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि काफी सैन्य उपकरण रूस से आयात किए गए हैं, जिनको यहां बनाने के लिए इनोवेशन और संसाधन जरूरी हैं। पंजाब में पहले से ही रेल कोच फैक्ट्री और अन्य बड़े संगठनों के लिए पार्ट बनाए जा रहे हैं। आटोमेशन के साथ ही यहां हर फैब्रिकेशन इंडस्ट्री भी है। पंजाब में यदि ऐसी इंडस्ट्री का सेटअप हो गया तो निश्चित रूप से इंडस्ट्री का आने वाला भविष्य सुनहरा होगा क्योंकि नाटो से अमेरिका के हाथ खींचने के बाद यूरोपियन कंट्री को भी रक्षा उपकरणों की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में पंजाब से रक्षा उपकरणों के निर्यात की संभावना भी ज्यादा हो जाती है।
उद्यमी बोले-सेना का सहयोग और मटेरियल चाहिए
सीआईआई में अलग अलग कंंपनियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि रक्षा उपकरणों को बनाया जा सकता हैै पर वह मानकों पर तभी उतर सकेंगे जब उनको उपकरणों में प्रयोग किया जाने वाला रॉ मटेरियल मिल सके। साथ ही सरकार से इस काम के लिए सब्सिडी भी दी जाए जिससे वह काम कर सकें। उद्यमियों का यह भी कहना था कि बेशक वह यूनिट्स लगा लें पर समस्या यह है कि उनका निवेश कितने समय में वापस होगा, यह तय नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि पहले ही यह मालूम हो सके कि जो यूनिट्स वह तैयार करेंगे, वह कितनी संख्या में होगी।
यह लोग रहे मौजूद
इस मौके पर हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के प्रेक्योरमेंट टीम के प्रमुख मुराली अग्रवाल ने कहा कि स्वदेशी अब देश की आवश्यकता है। पंजाब ही नहीं, देशभर में ऐसी इंडस्ट्री की तलाश जारी है। इस मौके पर पंजाब डवलपमेंट कमीशन की वाइस चेयरपर्सन सीमा बंसल और इनवेस्ट पंजाब के सीईओ अमित ढाका भी मौजूद रहे।
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Chandigarh News: पंजाब में बनाए जा सकते हैं रूस से आयातित टैंक और अन्य रक्षा उपकरणों के पार्ट
