[ad_1]
पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र सुरक्षा, विरोध प्रदर्शनों और परिसर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
इन मुद्दों पर दाखिल जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला गंभीर है, लेकिन पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्णय लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजिव बेरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुभाष सहगल को निर्देश दिया कि वह संबंधित सभी मुद्दों को लेकर 30 दिनों के भीतर पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपें। इसके साथ ही कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत मिलने के 90 दिनों के भीतर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने और कारणयुक्त निर्णय देने का आदेश दिया है।
याचिका में विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए गए थे। इनमें छात्रों और फैकल्टी के लिए स्थायी हाई-लेवल शिकायत निवारण समिति का गठन, वैध विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान तय करना, प्रदर्शनों में बाहरी तत्वों की भागीदारी पर रोक, प्रशासनिक भवनों, परीक्षा केंद्रों और शैक्षणिक विभागों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग शामिल थी। इसके अलावा कैंपस में हथियारों और आग्नेयास्त्रों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए सीधे न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। इन निर्देशों के साथ कोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।
[ad_2]
Chandigarh: पीयू में छात्र सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था पर पहले प्रशासन को दिया मौका


