Chandigarh: गोशाला में 60 गोवंश की मौत पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार Chandigarh News Updates

[ad_1]

चंडीगढ़ की रायपुर कलां की गोशाला में 60 से अधिक गोवंश की मौत के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। 

हाईकोर्ट ने इस प्रकरण को बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने टिप्पणी की है कि नियामक एजेंसियों ने आंखें मूंदे रखीं, जिसका खामियाजा बेजुबान पशुओं को जान देकर चुकाना पड़ा।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन, उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रथम दृष्टया प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी की कमी और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कहा कि नौ गायों के पोस्टमार्टम में से कम से कम सात के पेट से पॉलिथीन और प्लास्टिक कचरा बरामद हुआ। चंडीगढ़ में पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बावजूद इसका खुलेआम उपयोग होना नियामक तंत्र की विफलता को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि तथाकथित शिक्षित नागरिक भी सब्जियों और खाद्य पदार्थों का कचरा पॉलिथीन में डालकर फेंक देते हैं जिसे आवारा पशु खा लेते हैं और यही उनकी मौत का कारण बनता है।

क्षत विक्षत अवस्था में मिले थे गायों के शव

यह मामला तब सामने आया, जब मक्खन माजरा के दाह-संस्कार संयंत्र में बड़ी संख्या में गोवंश के शव मिलने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार 14 जनवरी को रायपुर कलां की गोशाला में संदिग्ध परिस्थितियों में 60 से अधिक गोवंश मृत पाए गए। कुछ शव क्षत-विक्षत अवस्था में थे जिनकी आंखें, खुर और सींग तक गायब पाए गए जिससे अवैध गतिविधियों और तस्करी की आशंका भी जताई गई। हाईकोर्ट ने यह भी गंभीरता से नोट किया कि रायपुर कलां में 1.79 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित कार्कस डिस्पोजल प्लांट, जिसका उद्घाटन 12 सितंबर 2025 को किया गया था और जिसके लिए पांच वर्षों का वार्षिक रखरखाव अनुबंध था, एक सप्ताह से अधिक समय तक बंद पड़ा रहा। इसके चलते गोवंश के शवों का ढेर लग गया और हालात और भी भयावह हो गए।

हाईकोर्ट को बताया-चल रही है मजिस्ट्रियल जांच

हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि नगर निगम ने मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ और कैटल पाउंड रायपुर कलां के एक इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है। वहीं, संविदा पर तैनात पशु चिकित्सक, सेनेटरी इंस्पेक्टर, सुपरवाइजर और अन्य मल्टी-टास्किंग स्टाफ की सेवाएं समाप्त की गई हैं। इसके अलावा, चंडीगढ़ के अतिरिक्त उपायुक्त को पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। इन सभी तथ्यों को देखते हुए जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय की असाधारण शक्तियों के प्रयोग का है और इसमें जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है।

[ad_2]
Chandigarh: गोशाला में 60 गोवंश की मौत पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार