Bhiwani News: शहर में 80 साल से तैयार हो रहे टेक्सटाइल इंजीनियर के धुरंधर Latest Haryana News

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फैक्ट्ररी में काम करते कारीगर। 

भिवानी। भिवानी में 80 साल से ही टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के धुरंधर तैयार हो रहे हैं, जो विदेशों में भी अब धूम मचा रहे हैं। भिवानी के टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (टीआईटीएस) की स्थापना घनश्यामदास बिरला ने 1943 में की थी।

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जीडी बिरला के दूरदर्शी दृष्टिकोण की वजह से उस समय कॉलेज में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कर रहे विद्यार्थियों के लिए कपड़ा उद्योग की व्यवहारिकता और बारीकियों को समझने के लिए ही पहले कपड़ा मिल भी स्थापित किया गया था। जिसकी नींव 28 जनवरी 1911 में संयुक्त पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर एचएच लुईस डैम ने रखी थी। जिसका स्थापना पत्थर आज भी टीआईटीएस परिसर में इसके इतिहास को बयां कर रहा है।

लगातार 80 सालों से टीआईटीएस कॉलेज देश भर के कपड़ा उद्योगों के लिए इंजीनियर की पौध तैयार करने में लगा है। अब तक टीआईटीएस से करीब पांच हजार से अधिक टेक्सटाइल इंजीनियर तैयार हो चुके हैं। टीआईटी मिल से भी करीब पांच हजार मजदूरों का सीधा रोजगार जुड़ा था। लेकिन परिस्थितियों की वजह से मिल 2014 में बंद हो गया, मगर टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई में किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ा। अब भी यहां से हर साल करीब सौ इंजीनियर तैयार हो रहे हैं।

भिवानी के टीआईटीएस में टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, टेक्नोलॉजी केमिस्ट्री, फैशन एंड अपैरल इंजीनियरिंग के साथ-साथ अन्य शाखाओं में इंजीनियरिंग और एमबीए, बीबीए कराई जा रही है। भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग टीआईटीएस से उत्तीर्ण इंजीनियर पूरे देश के अलावा अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया, जापान सहित विश्व भर में सेवाएं दे रहे हैं। फिलहाल टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले होनहारों को पंजाब, हिमाचल, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र में इंडस्टि्रयल ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। यहां के टेक्सटाइल इंजीनियरों की रोजगार गारंटी भी शत प्रतिशत है, क्योंकि भारतीय कपड़ा उद्योग के अलावा विदेशों की कपड़ा इंडस्ट्री में भी इंजीनियरिंग की काफी डिमांड बनी है।

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Bhiwani News: शहर में 80 साल से तैयार हो रहे टेक्सटाइल इंजीनियर के धुरंधर