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Aravali Forest: अरावली की हरियाली बचाने की मुहिम रंग लाई, NGT ने दिए जांच के आदेश


एनबीटी न्यूज, गुड़गांवः अरावली बचाओ नागरिक आंदोलन के सदस्यों की पर्यावरण बचाने की मुहिम रंग लाने लगी है। इनकी याचिका पर एनजीटी ने गुड़गांव संभाग की संयुक्त समिति को चार सप्ताह के भीतर क्षेत्र का दौरा कर अवैध खनन से पर्यावरण और राज्य के खजाने को हुए नुकसान का पता लगाने को कहा है। समन्वय और अनुपालन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। संयुक्त समिति को 3 महीने में तथ्यात्मक सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। अब 24 अगस्त को सुनवाई होगी।

एनजीटी अदालत ने पुलिस महानिदेशक और निदेशक, खनन-भूविज्ञान को भी निर्देश दिया है कि 5 वर्षों में अवैध खनन के संबंध में कितनी शिकायतें मिली हैं और इस पर क्या कार्रवाई हुई। यह हलफनामा दाखिल करें। अवैध खनन के क्षेत्रों में पर्यावरण की बहाली के लिए उठाए गए कदम के बारे में भी बताएं। आंदोलन की नीलम अहलूवालिया ने बताया कि 1 जून को उनकी टीम के सदस्य चंडीगढ़, पंचकुला, दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद और नूंह के सरकारी कार्यालयों में यह आदेश लेकर अफसरों के पास पहुंचे।

उन्होंने बताया कि मार्च 2021 से मार्च 2022 तक गुड़गांव, नूंह और फरीदाबाद के अरावली क्षेत्रों का दौरा किया था, जहां 16 स्थानों पर अवैध खनन हो रहा था। यह क्षेत्र पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम के संरक्षण के अंतर्गत आता है और हरियाणा अरावली में पेड़ों की कटाई, भूमि को साफ करने और पत्थरों के खनन पर रोक लगाता है।

ज्योति राघवन ने बताया कि सदस्यों ने अरावली के विभिन्न हिस्सों में 5 से 10 किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। तस्वीरें लीं, अवैध पत्थर और रेत खनन का विडियो बनाया। एक दशक से अरावली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे पर्यावरणविद् कर्नल ओबेरॉय ने कहा कि अवैध खनन की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, जिससे पर्यावरण व राज्य के खजाने पर असर पड़ता है।

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