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– 27 जगह से पीसीबी ने लिए सैंपल, जांच में मिला प्रदूषण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सैंपलों की रिपोर्ट एनजीटी के पास जमा कराई
वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। मारकंडा और टांगरी में बिना शोधन के 27 नालों का पानी गिर रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मारकंडा नदी में प्रदूषण की जांच के लिए हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए थे। इस निर्देश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने 27 जगहों से ड्रेनों, टांगरी नदी और मारकंडा नदी से पानी के सैंपल लिए थे। इन सैंपलों की रिपोर्ट एनजीटी के पास जमा करा दी गई है। एनजीटी से मिली जानकारी के अनुसार, अंबाला, कुरुक्षेत्र और पंचकूला जिलों के कुल 27 नाले सीधे रूप से मारकंडा और उसकी सहायक नदियों में बिना शोधित कचरा (अनट्रीटेड वेस्ट) गिरा रहे हैं। नदियों को प्रदूषित करने वाले सर्वाधिक 21 नाले अंबाला जिले में हैं।
जांच में सामने आया है कि हिमाचल के काला अंब औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला जत्तन वाला नाला मारकंडा नदी के प्रदूषण का मुख्य कारण है। जांच के दौरान इस नाले में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 135 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जो नदी की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसके गिरने के बाद हरियाणा में प्रवेश करते समय नदी के पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मारकंडा नदी में गिरने वाले गंदे नालों के कारण पानी में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और हानिकारक रसायनों की मात्रा बढ़ रही है। यह पानी सिर्फ इंसानों के लिए नहीं बल्कि जलीय जीवन के लिए भी खतरनाक है। यह सैंपल रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि नदी के संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।
मारकंडा नदी का पानी पीने योग्य तो है ही नहीं बल्कि खेतों में सिंचाई के योग्य भी नहीं है। इस रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने पंचायत विभाग, नगर निगम, नगर परिषद और जनस्वास्थ्य विभाग से समयबद्ध एक्शन टेकन प्लान रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही उन्हें मारकंडा नदी में प्रदूषण को खत्म करने के लिए प्लान मांगा है। अब इस एक्शन प्लान पर एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मामले में बुधवार को एनजीटी दिल्ली बैंच सुनवाई करेगी।
टांगरी में खुले आम गिरा रहे सीवरेज
एक तरफ जहां मारकंडा और टांगरी नदी के पानी में प्रदूषण को लेकर एनजीटी सख्त है तो वहीं दूसरी तरफ अंबाला कैंट में कुछ मोबाइल सीवरेज टैंक ऑपरेटरों ने इसे अपना कारोबार बना लिया है। कहीं से सीवरेज की समस्या आती है तो लोग इन प्राइवेट ऑपरेटरों को फोन कर बुलाते हैं। यह ऑपरेटर उनके सीवरेज से गंदगी अपने टैंक में भरकर सुबह व शाम के समय टांगरी नदी में खुलेआम गिरा रहे हैं। पिछले सात से आठ महीने से यह काम काफी बढ़ गया है, जिसके कारण टांगरी नदी का पानी प्रदूषित होता जा रहा है। इस पर अब तक किसी भी विभाग ने कार्रवाई नहीं की है। जबकि यह टैंकर अंबाला-जगाधरी राजमार्ग पर टांगरी नदी के ऊपर बने पुल से ही पाइप लगाकर सीवरेज की गंदगी नदी में मिला रहे हैं।
अंबाला में कुछ स्थानों पर नदी में प्रदूषण की स्थिति
केस 1
गढ़ौली गांव : यहां प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक पाया गया, जहां जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 40 और रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) 180 तक पहुंच गया है। बीओडी पानी में मौजूद सभी कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों को रासायनिक रूप से ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की कुल मात्रा है।
केस 2
हमीदपुर ब्रिज : जट्टन वाला नाला मिलने के बाद यहां बीओडी 18 और सीओडी 96 दर्ज किया गया। बीओडी वह ऑक्सीजन है जिसकी आवश्यकता सूक्ष्मजीवों को पानी में मौजूद जैविक कचरे (जैसे पत्तियां, सीवेज) को सड़ाने के लिए होती है।
केस 3
मुलाना और नगला राजपूताना : बेगना नदी और गांव के नालों के मिलने के बाद इन क्षेत्रों में भी जल की स्थिति चिंताजनक है। मुलाना में घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर घटकर 1.7 रह गया है, जो जलीय जीवन के लिए खतरनाक है। यह पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की वह मात्रा है, जो मछलियों और अन्य जलीय जीवों के सांस लेने के लिए आवश्यक होती है। (जल की गुणवत्ता को मापने के लिए बीओडी, सीओडी और डीओ तीन सबसे महत्वपूर्ण मानक हैं। ये हमें बताते हैं कि पानी कितना स्वच्छ है या उसमें प्रदूषण का स्तर क्या है।)
एनजीटी तक ऐसे पहुंचा मारकंडा नदी का केस
वर्ष 2022 में नारायणगढ़ के शिकायतकर्ता धर्मवीर ने वाद दायर किया था कि धार्मिक महत्व रखने वाली मारकंडा नदी में हिमाचल के त्रिलोकपुर स्थित उद्योगों का गंदा पानी नालों के माध्यम से डाला जा रहा है। जिससे यह नदी प्रदूषित हो रही है। इसके साथ ही कालाआंब में इससे बीमारियां फैलने का खतरा है। यह मामला हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से जुड़ा था। इसलिए इसमें एनजीटी ने जांच के लिए संयुक्त समिति का गठन किया था। समिति ने जल प्रदूषण को लेकर कई कमियां पाईं और सुधार के तरीकों को भी बताया। जांच में 37 ड्रेन इस नदी में गिरती पाईं गईं। मुख्य तौर पर पंचकूला, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिलों की यह ड्रेनें थी। एनजीटी ने मारकंडा नदी और कालाआंब क्षेत्र में बढ़ रहे औद्योगिक प्रदूषण पर अक्तूबर में सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला मजिस्ट्रेट सिरमौर द्वारा पेश की गई रिपोर्टों को अधूरा और त्रुटिपूर्ण मानते हुए उन्हें फटकार लगाई थी।
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