Ambala News: मरकरी को स्वास्थ्य उपकरणों से हटाएंगे साइंस कारोबारी Latest Haryana News

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– नए शोध और दिल्ली की कंपनी से रिसर्च पर मिलने की तैयारी

वैभव शर्मा

अंबाला। स्वास्थ्य से जुड़े उपकरणों में मरकरी के प्रयोग को कम किया जाएगा। अंबाला की साइंस इंडस्ट्री ने इस ओर कदम बढ़ा दिया है। इसके लिए नई शोध और दिल्ली की एक कंपनी से संपर्क भी किया जा रहा है। इनकी मदद से स्वास्थ्य जांच से जुड़े उपकरणों में मरकरी का विकल्प तलाश जाएगा। मौजूदा समय में थर्मामीटर, बैरोमीटर, रक्तचाप मापने वाले यंत्र आदि में मरकरी का प्रयोग होता है। वैश्विक पटल पर अब मरकरी को औद्योगिक प्रयोग से कम किया जा रहा है। ऐसे में अंबाला की साइंस इंडस्ट्री से जुड़े उद्योगपति इन यंत्रों को बनाते हैं। आगे बाजार में बने रहने के लिए वह मरकरी का विकल्प अभी से खोजना शुरू कर रहे हैं।

वर्ष 2030 तक ही कर सकेंगे उत्पादन

मरकरी पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए इसके प्रयोग को लगातार कम करने की बात की जा रही है। भारत सरकार ने मरकरी के प्रयोग को औद्योगिक क्षेत्र में में वर्ष 2025 तक प्रयोग की डेडलाइन निर्धारित की थी। मगर उद्योग संचालकों ने दलीलें दीं कि एक दम से मरकरी का प्रयोग बंद कर देंगे तो उन्हें काफी नुकसान होगा। इस पर सरकार ने उन्हें वर्ष 2030 तक की डेडलाइन दे दी है। इसके बाद मरकरी से बने उत्पाद बाजार में नहीं आएंगे और न ही उनका निर्माण किया जाएगा।

डिजिटल और एल्कोहल आधारित थर्मामीटर की नहीं है एक्यूरेसी

साइंस कारोबारी उमाकांत बताते हैं कि अभी बाजार में डिजिटल थर्मामीटर आता है। यह थर्मामीटर शरीर के तापमान को माइक्रोवोल्ट में बदलकर रीडिंग देता है। मगर क्लीनिकल प्रयोग में इसकी अधिक प्रमाणिकता नहीं है। दूसरा विकल्प एल्कोहल आधारित थर्मामीटर है। यह हमारे लिए सस्ता विकल्प है। मगर इसमें दिक्कत है कि यह एक कमरे का तापमान तो दे सकता है मगर शरीर के तापमान में प्रमाणिकता यहां भी संदेह के घेरे में आ जाती है। इसीलिए हम सभी साइंस कारोबारी मरकरी के विकल्प तलाश रहे हैं।

मरकरी का स्वास्थ्य पर प्रभाव

मरकरी के संपर्क में आने से तंत्रिका तंत्र को नुकसान हो सकता है। विशेषकर भ्रूण और बच्चों में पाचन, प्रतिरक्षा तंत्र और गुर्दों को क्षति पहुंच सकती है। इसके साथ ही फेफड़े, त्वचा और आंखों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। मरकरी का प्रयोग ग्रामीण अस्पतालों और छोटे क्लीनिकों में अभी भी होता है। यहां मरकरी युक्त थर्मामीटर और बीपी उपकरणों का उपयोग भी हो रहा है। मरकरी वाले कचरे का सुरक्षित संग्रहण और निपटान की व्यवस्था न होने के कारण कभी भी परेशानी हो सकती है।

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