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घरों से रात को विशेष रूप से तैयार बासी भोजन गुलगुले, पूड़ी और मीठे चावल लेकर पहुंचे भक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। महेश नगर, कच्चा बाजार और कुम्हार मंडी के शीतला माता मंदिरों में बासौडा पूजन किया गया। इस दौरान सुबह चार बजे से भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। दोपहर तक मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और हर तरफ माता की जय-जयकार गूंजती रही। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों से रात को विशेष रूप से तैयार किए गए बासी भोजन जिनमें गुलगुले, पूड़ी और मीठे चावल लेकर मंदिर पहुंचे।
शीतला माता को बासी खाने का भोग लगाने से परिवार को चेचक जैसी संक्रामक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। भक्त अपने बच्चों की सलामती और लंबी आयु की कामना के लिए माता के दरबार में पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों ने विशेष प्रबंध किए थे। मंदिरों के बाहर टेंट लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई थी।
मुर्गे को सिर के ऊपर घुमाने की प्रथा
कच्चा बाजार स्थित प्राचीन श्री माता महारानी दुर्गा देवी मंदिर (शीतला माता मंदिर) के उप-प्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने एक विशेष परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि लंबे समय से बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य लाभ के लिए मंदिर में मुर्गे को सिर के ऊपर से घुमाकर नजर उतारने की प्राचीन प्रथा भी निभाई गई।
प्राचीन मान्यता
मंदिर के पुजारी अरविंद भट्ट ने बताया कि जब शीतला माता पृथ्वी पर आईं, तो उन पर गर्म पानी डाल दिया गया था। जिससे उन्हें भारी कष्ट हुआ। तब भक्तों ने उन्हें राहत देने के लिए कच्ची लस्सी (दूध-पानी का मिश्रण) अर्पित की थी। तभी से माता को शीतल करने के लिए इस दिन बासी और ठंडे भोजन का भोग लगाने की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें ऋतु परिवर्तन के दौरान स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का संदेश भी देता है।
शीतला माता की पूजा करते श्रद्धालु। संवाद
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