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अंबाला। जननायक एक्सप्रेस में पहली बार बाल तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है। ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत आरपीएफ व जिला युवा विकास संगठन ने यह संयुक्त कार्रवाई मंगलवार रात को की। टीम ने ट्रेन नंबर 15211 दरभंगा-अमृतसर जननायक एक्सप्रेस से 10 बच्चों को रेस्क्यू किया है। संरक्षण में लिए गए बच्चे बिहार व यूपी के हैं जोकि बाल मजदूरी के तहत पंजाब ले जाए जा रहे थे।
आरपीएफ प्रभारी रविंद्र सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रेन नंबर 15211 जननायक एक्सप्रेस में बच्चों को काम के लिए पंजाब ले जाया जा रहा है। यह काम मानव तस्करी के तहत हो रहा है। सूचना के बाद टीम में एसआई कविता, एएसआई बलजीत, मुख्य सिपाही जसविंदर,अनूप सिंह, महिला सिपाही ललिता मीणा, सिपाही प्रवीण व कुलदीप सहित संगठन के अध्यक्ष परमजीत सिंह व कार्यक्रम समन्वयक अजय तिवारी सहित अन्य सदस्य प्लेटफार्म नंबर 6 पर पहुंचे। लगभग 10 बजे ट्रेन जैसे ही प्लेटफार्म पर रुकी तो टीम अलग-अलग कोच में सवार हो गई। इस दौरान संदिग्ध अवस्था व अकेले मिले 10 बच्चों को प्लेटफार्म पर उतार लिया गया।
14 से 17 साल के हैं नाबालिग
देर रात तक चली काउंसलिंग में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 14 से 17 साल के बीच है। इनमें से अधिकांश बच्चे बिहार के मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, सहरसा, समस्तीपुर और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रहने वाले हैं। बच्चों ने बताया कि वो बेहद ही गरीब परिवार से हैं। इसलिए मजदूरी के लिए उन्हें पंजाब ले जाया जा रहा था।
मेडिकल के बाद एनजीओ को सुपुर्द
अजय तिवारी ने बताया कि सभी बच्चों का रात 11:30 बजे अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल से मेडिकल करवाया गया। फिलहाल बच्चों को काउंसलिंग और आगामी कार्रवाई के लिए एनजीओ के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जो इन बच्चों को पंजाब ले जा रहे थे।
तस्करों ने बदली ट्रेन
ट्रेनों के माध्यम से हो रही बाल तस्करी पर कसे जा रहे शिकंजे को लेकर तस्करों ने भी अपनी कार्यशैली में बदलाव किया है। पहले तस्कर ट्रेन नंबर 12407 न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर कर्मभूमि एक्सप्रेस से बाल तस्करी का खेल चला रहे थे जोकि दोपहर के समय कैंट स्टेशन पहुंचती थी लेकिन इस बार तस्करों ने ट्रेन को ही बदल दिया और जननायक एक्सप्रेस से बच्चों को पंजाब की तरफ भेजने का फैसला किया ताकि रात के समय कैंट स्टेशन से निकलने वाली ट्रेन में जांच न हो पाए, लेकिन तस्करों की यह चाल सफल नहीं हो पाई।
बाल तस्करी एवं बाल श्रम के मामलों में निरंतर वृद्धि अत्यंत चिंता का विषय है। अंबाला कैंट स्टेशन पर विभिन्न ट्रेनों में इस प्रकार के अभियान चलाकर 46 बच्चों को मुक्त कराया जा चुका है तथा आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की गई है। संगठन भविष्य में भी इसी प्रकार बाल तस्करी के विरुद्ध अभियान जारी रखेगा।
– परमजीत सिंह बड़ोला, अध्यक्ष, जिला युवा विकास संगठन।
बच्चों को शेल्टर होम भेज दिया गया है। बच्चों के अभिभावकों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उन्हें बुलाकर काउंसलिंग की जाए और वह दोबारा अपने बच्चों को मजदूरी के लिए न भेजें।
– रंजीता संचदेवा, चेयरपर्सन, बाल कल्याण समिति।
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