[ad_1]
अंबाला सिटी। सरकार और प्रशासन भले ही समाधान शिविरों के जरिए जनता को न्याय पहुंचाने का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर तस्वीर अब भी उम्मीदों के उलट है। वीरवार को डीसी कार्यालय में आयोजित समाधान शिविर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों के हाथ सिर्फ आश्वासन ही लगा।
शिविर में सबसे चौंकाने वाला मामला लुधियाना निवासी जसप्रीत कौर का रहा। जसप्रीत ने अंबाला के एक ब्यूटी ट्रेनिंग संस्थान पर 40 हजार रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया। पीड़िता के अनुसार, संस्थान ने फीस तो वसूली लेकिन न तो कोर्स पूरा कराया और न ही कोई रसीद दी। जब पारिवारिक कारणों से जसप्रीत ने लुधियाना सेंटर में ट्रांसफर या रिफंड मांगा, तो संस्थान ने साफ इनकार कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि समाधान शिविर में इसे क्राइम का मामला बताकर पीड़िता को थाने जाने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया गया। डीसी कार्यालय में चक्कर काटने के बाद मायूस जसप्रीत ने अब अगले हफ्ते सीधे जिला उपायुक्त से मिलकर न्याय की गुहार लगाने का निर्णय लिया है।
2 घंटे चली बैठक, आए केवल 4 मामले
सीईओ गगनदीप की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में बिजली, खाद्य आपूर्ति, समाज कल्याण और क्रीड विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। कहने को तो यह शिविर परिवार पहचान पत्र, राशन कार्ड और पेंशन संबंधी त्रुटियों को दूर करने के लिए था, लेकिन पूरे समय में केवल 4 मामले ही सामने आए। सीईओ ने अधिकारियों को समाधान के निर्देश तो दिए, लेकिन विभागीय कर्मचारियों द्वारा समय मांगने की प्रवृत्ति ने लोगों को परेशान किया। शिविर में आए लोगों का कहना था कि समाधान की धीमी रफ्तार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है।
[ad_2]
Source link




