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अंबाला। उत्तर रेलवे की लापरवाही सामने आई है। जिस सफाई के काम के लिए रेलवे कंपनी को 6.14 करोड़ रुपये का भुगतान करना था अब रेलवे की लापरवाही से 10 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। इस मामले में इतनी लापरवाही दिखाई गई कि रेलवे ने कोर्ट में याचिका लगाने में भी समय व्यर्थ कर दिया, जिसके कारण कोर्ट में पहुंचते ही यह मामला समय पर न लगने के कारण अप्रैल में एडीजे राजन वालिया ने खारिज कर दिया था। अब इस मामले में रेलवे को ठेकेदार को चार करोड़ रुपये अतिरिक्त देने होंगे। मामला श्री साई फैसिलिटीज नामक फर्म से जुड़ा हुआ है, जिसने वर्ष 2016 से 2018 तक सफाई व स्वच्छता का 17 अनुबंधों के तहत काम किया था।
यह था मामला
यह मामला मंडल रेल प्रबंधक बनाम मेसर्स श्री साई फैसिलिटीज के बीच का था, जिसमें मेसर्स श्री साई फैसिलिटीज ने वर्ष 2016-2018 के दौरान कुल 6,14,17,494 रुपये का काम पूरा कर लिया था, लेकिन उसे इसका भुगतान नहीं मिला इसके बाद फर्म ने हरियाणा सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद में आवेदन दायर कर मूल राशि के साथ-साथ ब्याज, जमा राशि की वापसी और मुआवजे की मांग की थी। मध्यस्थ ने 29 मई 2024 के अपने निर्णय में मेसर्स श्री साई फैसिलिटीज के पक्ष में फैसला सुनाया और फर्म को 6,14,17,494 रुपये की मूल राशि, 3,41,35,765 रुपये का ब्याज और अन्य खर्चों सहित कुल 10 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।
देरी की माफी का आवेदन खारिज
परिषद के इस निर्णय के लिए मंडल रेल प्रबंधक ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम 1996 की धारा 34 के तहत याचिका दायर की थी। याचिका 52 दिनों की देरी से दायर की गई। रेलवे की तरफ से वकील ने देरी का कारण सरकारी कामकाज बताया। अदालत ने पाया कि आवेदन को मध्यस्थ निर्णय प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर दायर किया जाना चाहिए, जिसमें 30 दिनों की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है, लेकिन इसके बाद नहीं। चूंकि यह याचिका निर्धारित समय सीमा के बाद दायर की गई थी, इसलिए अदालत ने इसे खारिज कर दिया गया।
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