Ambala News: ओवरलोडेड ट्रकों से अवैध वसूली के मामले में पांच कर्मचारियों पर चलेगा मुकदमा Latest Haryana News

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अंबाला सिटी। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) अंबाला में ओवरलोडेड वाहनों को सुरक्षित रास्ता दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित अवैध वसूली के मामले में अंबाला की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में पूर्व एचसीएस अधिकारी अमरिंदर सिंह को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। हालांकि, अदालत को मामले में शामिल अन्य पांच आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी।

अदालत ने माना कि शेष आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। जिन आरोपियों पर मुकदमा चलेगा, उनमें अजय सैनी (निरीक्षक), गुरप्रीत सिंह (निजी ट्रांसपोर्टर), करणवीर सिंह (चालक), जसपाल सिंह (सहायक उप-निरीक्षक), सुनील कुमार शामिल हैं। इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी में आपराधिक षड़यंत्र की धारा 120-बी के तहत मामला चलेगा।

जानकारी के अनुसार मामला 17 दिसंबर 2021 को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो (अब एंटी करप्शन ब्यूरो) अंबाला की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोप था कि आरटीए स्टाफ और निजी एजेंटों की मिलीभगत से ओवरलोडेड ट्रकों को बिना किसी चेकिंग के निकलने देने के लिए मासिक वसूली की जा रही थी। शिकायतकर्ता देवराज ने आरोप लगाया था कि प्रति वाहन 6,000 से 12,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। छापा मारी के दौरान निजी ट्रांसपोर्टर गुरप्रीत सिंह के पास से हजारों रुपये बरामद हुए थे, जिसके बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अमरिंदर सिंह के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं मिला है। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि रिश्वत की राशि सीधे तौर पर अमरिंदर सिंह तक पहुंची थी। जांच के दौरान आरोपी के पास से किसी भी प्रकार की अवैध राशि बरामद नहीं हुई। अदालत ने माना कि मांग और स्वीकृति की कड़ी पूरी नहीं होती, जिसके बिना भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता।


जांच में ये हुआ खुलासा

इस मामले की जांच में यह खुलासा हुआ कि ओवरलोडेड ट्रकों की पहचान के लिए एक खास कोड का इस्तेमाल किया जाता था। मुख्य आरोपी गुरप्रीत सिंह के पास से डीपीएस फ्रेश फ्रूट लिखे हुए स्टिकर बरामद हुए। जो ट्रक मालिक रिश्वत (मंथली) देते थे, उनके ट्रकों पर यह स्टिकर लगा दिया जाता था ताकि आरटीए (आरटीए) स्टाफ उन्हें न रोके और वे बिना किसी जांच के निकल सकें। जांच में सामने आया कि अवैध वसूली का एक पूरा सिस्टम बना हुआ था। आरोपी गुरप्रीत सिंह और जसपाल सिंह अंबाला के मोटर मार्केट में लकी ट्रेडिंग कंपनी के नाम से एक कार्यालय चला रहे थे, जो कथित तौर पर इस वसूली का केंद्र था।


यहां से आया केस में मोड़

मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब एक आरोपी खुद गवाह बन गया। सह-आरोपी एएसआई जसपाल सिंह ने धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया और सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई। 12 सितंबर 2022 को अदालत ने एएसआई जसपाल सिंह को इस शर्त पर क्षमादान दे दिया कि वह मामले से जुड़े सभी तथ्यों का सही खुलासा करेंगे।

वहीं पूर्व एचसीएस के संबंध में तथ्य सामने आया कि जिस दिन (17 दिसंबर 2021) विजिलेंस ने छापेमारी की थी, उस समय अमरिंदर सिंह के पास अंबाला आरटीए का कार्यभार नहीं था। उन्होंने 23 नवंबर 2021 को ही यह प्रभार छोड़ दिया था। उनके वकील ने तर्क दिया कि उनके कार्यकाल के दौरान सरल स्कोर 6.4 से बढ़कर 9.5 हो गया था, जो उनके अच्छे काम का प्रमाण है। विजिलेंस यह साबित नहीं कर सकी कि बरामद किए गए पैसों या रिश्वत की मांग में उनकी कोई सीधी भूमिका थी ।

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